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Q: Which of the following method of teaching is not student friendly ? निम्नलिखित में से कौन-सी शिक्षण विधि छात्रों के अनुकूल नहीं है?
  • A. Problem-solving method/समस्या-समाधान विधि
  • B. Project method/परियोजना विधि
  • C. Discovery method/अन्वेषण विधि
  • D. Demonstration method/प्रदर्शन विधि
Correct Answer: Option D - समस्या समाधान विधि– यह शिक्षण की एक प्राचीन विधि हैं। इसमें छात्रों के सामने कोई समस्या रखी जाती है। इसके बाद छात्र विधि के चरणों को अपनाते हुए उसे हल करने का प्रयास करते है। शिक्षक समय-समय पर छात्रों की सहायता व जाँच करते हैं। इसमें छात्रों की चिन्तन शक्ति, निरीक्षण शक्ति, खोज करने की शक्ति का विकास होता है। यह एक व्यवहारिक विधि है। इसके अध्ययन से भविष्य में आने वाली समस्याओं को चरणबद्ध तरीके से हल करना सीखते हैं। परियोजना विधि–इस विधि का मूल आधार परियोजनावाद है। इसमें छात्रों के सामने ऐसे अवसर लाने चाहिए, जिनमें वे अपने साथियों की सहायता से निर्णय कर सवेंâ कि उन्हें किस सीमा तक क्या पढ़ना है। इस विधि में बालक अपने अनुभव के आधार पर सीखते हैं। उन्हें स्वतंत्र रूप से सोचने विचारने का अवसर प्राप्त होता है तथा उनका शारीरिक और मानसिक विकास होता है। खोज विधि– इस विधि का तात्पर्य बालकों को कम से कम बताने और उन्हें स्वयं अधिक से अधिक खोजकर सत्य को पहचानने के लिये प्रेरित करने से हैं। इस विधि में अध्यापक बहुत कम बताता हैं अध्यापक केवल बालकों के समक्ष समस्यायें रख देता है जिनकों वह पुस्तकों और यन्त्रों की सहायता से स्वयं के प्रयत्नों के द्वारा हल करते हैं। आवश्यकता पड़ने पर वह शिक्षकों से परामर्श कर सकते है। प्रदर्शन विधि– इस विधि में अध्यापक पाठ विषय के व्याख्यान के साथ-साथ पाठ विषय से संबंधित आवश्यक प्रयोग अध्यापक स्वयं करके छात्रों को दिखाते हैं। किसी वस्तु के बारे में पढ़ाने पर उस वस्तु को प्रदर्शित करके उस वस्तु की रचना एवं कार्य प्रणाली का वास्तविक रूप से ज्ञान कराता है। अत: उपर्युक्त व्याख्या के आधार पर हम यह कह सकते है कि समस्या समाधान विधि, परियोजना विधि, खोज विधि छात्र हितैषी शिक्षण के तरीके है तथा प्रदर्शन विधि छात्र हितैषी शिक्षण के तरीके के अन्तर्गत शामिल नहीं है।
D. समस्या समाधान विधि– यह शिक्षण की एक प्राचीन विधि हैं। इसमें छात्रों के सामने कोई समस्या रखी जाती है। इसके बाद छात्र विधि के चरणों को अपनाते हुए उसे हल करने का प्रयास करते है। शिक्षक समय-समय पर छात्रों की सहायता व जाँच करते हैं। इसमें छात्रों की चिन्तन शक्ति, निरीक्षण शक्ति, खोज करने की शक्ति का विकास होता है। यह एक व्यवहारिक विधि है। इसके अध्ययन से भविष्य में आने वाली समस्याओं को चरणबद्ध तरीके से हल करना सीखते हैं। परियोजना विधि–इस विधि का मूल आधार परियोजनावाद है। इसमें छात्रों के सामने ऐसे अवसर लाने चाहिए, जिनमें वे अपने साथियों की सहायता से निर्णय कर सवेंâ कि उन्हें किस सीमा तक क्या पढ़ना है। इस विधि में बालक अपने अनुभव के आधार पर सीखते हैं। उन्हें स्वतंत्र रूप से सोचने विचारने का अवसर प्राप्त होता है तथा उनका शारीरिक और मानसिक विकास होता है। खोज विधि– इस विधि का तात्पर्य बालकों को कम से कम बताने और उन्हें स्वयं अधिक से अधिक खोजकर सत्य को पहचानने के लिये प्रेरित करने से हैं। इस विधि में अध्यापक बहुत कम बताता हैं अध्यापक केवल बालकों के समक्ष समस्यायें रख देता है जिनकों वह पुस्तकों और यन्त्रों की सहायता से स्वयं के प्रयत्नों के द्वारा हल करते हैं। आवश्यकता पड़ने पर वह शिक्षकों से परामर्श कर सकते है। प्रदर्शन विधि– इस विधि में अध्यापक पाठ विषय के व्याख्यान के साथ-साथ पाठ विषय से संबंधित आवश्यक प्रयोग अध्यापक स्वयं करके छात्रों को दिखाते हैं। किसी वस्तु के बारे में पढ़ाने पर उस वस्तु को प्रदर्शित करके उस वस्तु की रचना एवं कार्य प्रणाली का वास्तविक रूप से ज्ञान कराता है। अत: उपर्युक्त व्याख्या के आधार पर हम यह कह सकते है कि समस्या समाधान विधि, परियोजना विधि, खोज विधि छात्र हितैषी शिक्षण के तरीके है तथा प्रदर्शन विधि छात्र हितैषी शिक्षण के तरीके के अन्तर्गत शामिल नहीं है।

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समस्या समाधान विधि– यह शिक्षण की एक प्राचीन विधि हैं। इसमें छात्रों के सामने कोई समस्या रखी जाती है। इसके बाद छात्र विधि के चरणों को अपनाते हुए उसे हल करने का प्रयास करते है। शिक्षक समय-समय पर छात्रों की सहायता व जाँच करते हैं। इसमें छात्रों की चिन्तन शक्ति, निरीक्षण शक्ति, खोज करने की शक्ति का विकास होता है। यह एक व्यवहारिक विधि है। इसके अध्ययन से भविष्य में आने वाली समस्याओं को चरणबद्ध तरीके से हल करना सीखते हैं। परियोजना विधि–इस विधि का मूल आधार परियोजनावाद है। इसमें छात्रों के सामने ऐसे अवसर लाने चाहिए, जिनमें वे अपने साथियों की सहायता से निर्णय कर सवेंâ कि उन्हें किस सीमा तक क्या पढ़ना है। इस विधि में बालक अपने अनुभव के आधार पर सीखते हैं। उन्हें स्वतंत्र रूप से सोचने विचारने का अवसर प्राप्त होता है तथा उनका शारीरिक और मानसिक विकास होता है। खोज विधि– इस विधि का तात्पर्य बालकों को कम से कम बताने और उन्हें स्वयं अधिक से अधिक खोजकर सत्य को पहचानने के लिये प्रेरित करने से हैं। इस विधि में अध्यापक बहुत कम बताता हैं अध्यापक केवल बालकों के समक्ष समस्यायें रख देता है जिनकों वह पुस्तकों और यन्त्रों की सहायता से स्वयं के प्रयत्नों के द्वारा हल करते हैं। आवश्यकता पड़ने पर वह शिक्षकों से परामर्श कर सकते है। प्रदर्शन विधि– इस विधि में अध्यापक पाठ विषय के व्याख्यान के साथ-साथ पाठ विषय से संबंधित आवश्यक प्रयोग अध्यापक स्वयं करके छात्रों को दिखाते हैं। किसी वस्तु के बारे में पढ़ाने पर उस वस्तु को प्रदर्शित करके उस वस्तु की रचना एवं कार्य प्रणाली का वास्तविक रूप से ज्ञान कराता है। अत: उपर्युक्त व्याख्या के आधार पर हम यह कह सकते है कि समस्या समाधान विधि, परियोजना विधि, खोज विधि छात्र हितैषी शिक्षण के तरीके है तथा प्रदर्शन विधि छात्र हितैषी शिक्षण के तरीके के अन्तर्गत शामिल नहीं है।