Correct Answer:
Option D - सोडियम वाष्प लैंप लगभग एकवर्णी प्रकाश उत्पन्न करता है। जिस प्रकाश में एकल तरंगदैर्घ्य होता है उसे एकवर्णीं (मोनोक्रोमैटिक) प्रकाश कहते है।
सोडियम वाष्प को प्रकाश के रुप में प्रयोग करके उच्च ल्यूमेन दक्षता प्राप्त की जा सकती है।
सोडियम वाष्प लैम्पो की दक्षता 40-50 lumenW होती है।
इसका जीवनकाल 3000 घंटा होता है।
यह लैम्प 220V, A.C. पर कार्य करते है।
इसके विसर्जन ट्यूब में धात्विक सोडियम के साथ नियॉन गैस भरी (neon gas) होती है।
जब लैम्प को सप्लाई से जोड़ा जाता है, तो नियान गैस में विसर्जन उत्पन्न होता है, तथा लाल-नारंगी ग्लो देता है।
आयनीकृत होने पर नियॉन गैस नारंगी-पीला प्रकाश देता है।
सोडियम लवण लैम्पो द्वारा दिया गया प्रकाश पीला होता है।
सोडियम वाष्प लैम्पो का प्रयोग बाह्य क्षेत्रो सड़क चौराहो पर प्रकाश हेतु प्रयोग किया जाता है।
D. सोडियम वाष्प लैंप लगभग एकवर्णी प्रकाश उत्पन्न करता है। जिस प्रकाश में एकल तरंगदैर्घ्य होता है उसे एकवर्णीं (मोनोक्रोमैटिक) प्रकाश कहते है।
सोडियम वाष्प को प्रकाश के रुप में प्रयोग करके उच्च ल्यूमेन दक्षता प्राप्त की जा सकती है।
सोडियम वाष्प लैम्पो की दक्षता 40-50 lumenW होती है।
इसका जीवनकाल 3000 घंटा होता है।
यह लैम्प 220V, A.C. पर कार्य करते है।
इसके विसर्जन ट्यूब में धात्विक सोडियम के साथ नियॉन गैस भरी (neon gas) होती है।
जब लैम्प को सप्लाई से जोड़ा जाता है, तो नियान गैस में विसर्जन उत्पन्न होता है, तथा लाल-नारंगी ग्लो देता है।
आयनीकृत होने पर नियॉन गैस नारंगी-पीला प्रकाश देता है।
सोडियम लवण लैम्पो द्वारा दिया गया प्रकाश पीला होता है।
सोडियम वाष्प लैम्पो का प्रयोग बाह्य क्षेत्रो सड़क चौराहो पर प्रकाश हेतु प्रयोग किया जाता है।