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Q: Which of the following is the natural cause for over-voltages in a power system? एक शक्ति प्रणाली में अति-वोल्टता का प्राकृतिक कारण निम्नलिखित में से कौन-सा है?
  • A. Lightning/ तड़ित
  • B. Resonance / अनुनाद
  • C. Insulation failure / विद्युतरोधन विफलता
  • D. Switching surges/ स्विचन प्रोत्कर्ष (सर्ज)
Correct Answer: Option A - Lightening विद्युत प्रणाली में अधिक वोल्टेज का प्राकृतिक कारण होता है। ∎ आसमान में बादलो के बीच एक आवेशित बादल और भू (Earth) या एक ही बादल में विभिन्न आवेशों के वायुमण्डलीय विद्युत विसर्जन को तड़ित कहते है। ∎ विद्युत प्रणाली में तड़ित से सुरक्षा के लिए थायराइट तडि़त निरोधक बिना समय पश्चता के कार्य करता है और बहुत उच्च घातक वोल्टताओं से रक्षण हेतु इसका उपयोग किया जाता है। ∎ तड़ित विद्युत के कारण अति उच्च वोल्टताओं की उपस्थिति से उत्पन्न सर्ज के समय निरोधक में उच्च मान की धारा प्रवाहित होती है परन्तु हिल्लोल तरंग प्रवाहित हो जाने के उपरान्त सामान्य धारा तरंग हेतु थायराइट पुन: उच्च प्रतिरोध धारण कर लेता है।
A. Lightening विद्युत प्रणाली में अधिक वोल्टेज का प्राकृतिक कारण होता है। ∎ आसमान में बादलो के बीच एक आवेशित बादल और भू (Earth) या एक ही बादल में विभिन्न आवेशों के वायुमण्डलीय विद्युत विसर्जन को तड़ित कहते है। ∎ विद्युत प्रणाली में तड़ित से सुरक्षा के लिए थायराइट तडि़त निरोधक बिना समय पश्चता के कार्य करता है और बहुत उच्च घातक वोल्टताओं से रक्षण हेतु इसका उपयोग किया जाता है। ∎ तड़ित विद्युत के कारण अति उच्च वोल्टताओं की उपस्थिति से उत्पन्न सर्ज के समय निरोधक में उच्च मान की धारा प्रवाहित होती है परन्तु हिल्लोल तरंग प्रवाहित हो जाने के उपरान्त सामान्य धारा तरंग हेतु थायराइट पुन: उच्च प्रतिरोध धारण कर लेता है।

Explanations:

Lightening विद्युत प्रणाली में अधिक वोल्टेज का प्राकृतिक कारण होता है। ∎ आसमान में बादलो के बीच एक आवेशित बादल और भू (Earth) या एक ही बादल में विभिन्न आवेशों के वायुमण्डलीय विद्युत विसर्जन को तड़ित कहते है। ∎ विद्युत प्रणाली में तड़ित से सुरक्षा के लिए थायराइट तडि़त निरोधक बिना समय पश्चता के कार्य करता है और बहुत उच्च घातक वोल्टताओं से रक्षण हेतु इसका उपयोग किया जाता है। ∎ तड़ित विद्युत के कारण अति उच्च वोल्टताओं की उपस्थिति से उत्पन्न सर्ज के समय निरोधक में उच्च मान की धारा प्रवाहित होती है परन्तु हिल्लोल तरंग प्रवाहित हो जाने के उपरान्त सामान्य धारा तरंग हेतु थायराइट पुन: उच्च प्रतिरोध धारण कर लेता है।