Explanations:
भारतीय रिजर्व बैंक साख नियंत्रण के तहत गुणात्मक एवं परिमाणात्मक तरीकों को अपनाता है। जिसमें परिमाणात्मक साख नियंत्रण के तहत वह चार तरीकों को अपनाता है – (i) बैंक दर (ii) नकद कोष अनुपात (iii) खुले बाजार की क्रियाएं (iv) एस.एल.आर.। जबकि वाणिज्यिक बैंक जिस दर पर ग्राहकों को ऋण प्रदान करता है उसे PLR कहते हैं। प्रधान उधारी दर (Prime Lending Rate : PLR) वह ब्याज दर होती है, जिस पर बैंक अपने विश्वसनीय ग्राहकों को ऋण देता है। PLR एक प्रकार से आधार ब्याज दर की भूमिका अदा करता है।