search
Q: Which of the following is example for sub surface irrigation? निम्नलिखित में से कौन-सा अध: स्तल सिंचाई का उदाहरण है?
  • A. Sprinkler irrigation/छिड़काव सिंचाई
  • B. Drip irrigation/टपकन सिंचाई
  • C. Flow irrigation/प्रवाह सिंचाई
  • D. Furrow irrigation/कुंड सिंचाई
Correct Answer: Option B - : ड्रिप सिंचाई विधि (Drip irrigation method)– ∎ इसे ट्रिकल सिंचाई या माइक्रो सिंचाई या स्थानीय सिंचाई भी कहते हैं। ∎ यह उन जगहों पर अपनायी जाती है, जहाँ सिंचाई के पानी की कमी और नमक की समस्या हो। ∎ इस पद्धति में पानी को सीधे पौधों के जड़ क्षेत्र में पहुँचाया जाता है जिससे वाष्पीकरण और रिसाव से होने वाली हानि कम हो जाती है। ∎ जड़ क्षेत्र में पानी पहुँचाने के लिये छिद्रित पाइपों में पानी लगभग 2.5 गुना वायुमंडलीय दाब पर पानी भेजते हैं। ∎ इसकी दक्षता सबसे अधिक होती है। परन्तु यह एक महंगी विधि है जिसमें विशेष ज्ञान व परीक्षण की आवश्यकता होती है। ∎ इस विधि का उपयोग छोटी नर्सरी, बाग-बगीचों, फलों व सब्जियों की सिंचाई के लिये करते हैं।
B. : ड्रिप सिंचाई विधि (Drip irrigation method)– ∎ इसे ट्रिकल सिंचाई या माइक्रो सिंचाई या स्थानीय सिंचाई भी कहते हैं। ∎ यह उन जगहों पर अपनायी जाती है, जहाँ सिंचाई के पानी की कमी और नमक की समस्या हो। ∎ इस पद्धति में पानी को सीधे पौधों के जड़ क्षेत्र में पहुँचाया जाता है जिससे वाष्पीकरण और रिसाव से होने वाली हानि कम हो जाती है। ∎ जड़ क्षेत्र में पानी पहुँचाने के लिये छिद्रित पाइपों में पानी लगभग 2.5 गुना वायुमंडलीय दाब पर पानी भेजते हैं। ∎ इसकी दक्षता सबसे अधिक होती है। परन्तु यह एक महंगी विधि है जिसमें विशेष ज्ञान व परीक्षण की आवश्यकता होती है। ∎ इस विधि का उपयोग छोटी नर्सरी, बाग-बगीचों, फलों व सब्जियों की सिंचाई के लिये करते हैं।

Explanations:

: ड्रिप सिंचाई विधि (Drip irrigation method)– ∎ इसे ट्रिकल सिंचाई या माइक्रो सिंचाई या स्थानीय सिंचाई भी कहते हैं। ∎ यह उन जगहों पर अपनायी जाती है, जहाँ सिंचाई के पानी की कमी और नमक की समस्या हो। ∎ इस पद्धति में पानी को सीधे पौधों के जड़ क्षेत्र में पहुँचाया जाता है जिससे वाष्पीकरण और रिसाव से होने वाली हानि कम हो जाती है। ∎ जड़ क्षेत्र में पानी पहुँचाने के लिये छिद्रित पाइपों में पानी लगभग 2.5 गुना वायुमंडलीय दाब पर पानी भेजते हैं। ∎ इसकी दक्षता सबसे अधिक होती है। परन्तु यह एक महंगी विधि है जिसमें विशेष ज्ञान व परीक्षण की आवश्यकता होती है। ∎ इस विधि का उपयोग छोटी नर्सरी, बाग-बगीचों, फलों व सब्जियों की सिंचाई के लिये करते हैं।