Correct Answer:
Option A - संविधान के भाग XX (20) के अनु– 368 में संसद को संविधान एवं इसकी व्यवस्था में संशोधन की शक्ति प्रदान की गयी है। जिसके अन्तर्गत संशोधन विधेयक को दोनों सदनों (लोकसभा एवं राज्यसभा) से अलग–अलग पारित कराना अनिवार्य है जबकि दोनों सदनों के बीच असहमति होने पर दोनों सदनों की संयुक्त बैठक में विधेयक को पारित कराने का प्रावधान नहीं है। संसद को राज्य सूची के विषयों पर कानून बनाने का अधिकार अनुच्छेद 249 के तहत राज्यसभा द्वारा प्रदान किया जाता है। धन विधेयकों के संबंध में लोकसभा के पास शक्ति होती है क्योंकि इसे लोकसभा में ही पुर: स्थापित किया जा सकता है तथा राज्यसभा इसमें कोई संशोधन या अस्वीकृति नहीं दे सकती है, वह सलाह के रूप में संशोधन प्रस्तावित कर सकती है जिसे मानने को लोकसभा बाध्य नहीं है। दोनों सदनों से पारित संवैधानिक संशोधनों को अंतिम मंजूरी राष्ट्रपति द्वारा प्रदान किया जाता है।
A. संविधान के भाग XX (20) के अनु– 368 में संसद को संविधान एवं इसकी व्यवस्था में संशोधन की शक्ति प्रदान की गयी है। जिसके अन्तर्गत संशोधन विधेयक को दोनों सदनों (लोकसभा एवं राज्यसभा) से अलग–अलग पारित कराना अनिवार्य है जबकि दोनों सदनों के बीच असहमति होने पर दोनों सदनों की संयुक्त बैठक में विधेयक को पारित कराने का प्रावधान नहीं है। संसद को राज्य सूची के विषयों पर कानून बनाने का अधिकार अनुच्छेद 249 के तहत राज्यसभा द्वारा प्रदान किया जाता है। धन विधेयकों के संबंध में लोकसभा के पास शक्ति होती है क्योंकि इसे लोकसभा में ही पुर: स्थापित किया जा सकता है तथा राज्यसभा इसमें कोई संशोधन या अस्वीकृति नहीं दे सकती है, वह सलाह के रूप में संशोधन प्रस्तावित कर सकती है जिसे मानने को लोकसभा बाध्य नहीं है। दोनों सदनों से पारित संवैधानिक संशोधनों को अंतिम मंजूरी राष्ट्रपति द्वारा प्रदान किया जाता है।