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Q: Which of the following initiates the birth process does? निम्नलिखित में से कौन सा जन्म प्रक्रिया को आरंभ करता है ? I. Garbh Pyush I. गर्भ पीयूष II. Adrenal System II. अधिवृक्क प्रणाली
  • A. (a) Neither I nor II/ना ही I ना ही II
  • B. Only II/केवल II
  • C. Only I/केवल I
  • D. Both I and II/I तथा II दोनों
Correct Answer: Option D - जन्म की प्रक्रिया का आरम्भ गर्भ पीयूष तथा अधिवृक्क प्रणाली दोनों करता है। अधिवृक्क ग्रंथि एक बहुत महत्वपूर्ण ग्रंथि होती है। इसकी कमी से पीड़ित महिलाओं के गर्भवती होने की सम्भावना नहीं होती है। यदि वे ऐसा करते हैं, तो उनमें संचार संबंधी गड़बड़ी और कार्बोहाइड्रेट, इलेक्ट्रोलाइड और द्रवअसंतुलन से पीड़ित होने की अधिक प्रवृत्ति होती है क्योंकि पानी, सोडियम, पोटैशियम, क्लोराइड और ग्लूकोज के चयापचय में अधिवृक्क ग्रंंथियाँ महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। ऐसे रोगी और उनके बच्चे यदि गर्भ के दौरान हार्मोनल थेरेपी प्राप्त करते हैं तो वे अच्छा करते हैं। गर्भ पीयूष ग्रंथि से ऑक्सीटोसीन गर्भाशय पेशी पर क्रिया करता है और इसके कारण गर्भाशय में तीव्र संकुचन प्रारम्भ हो जाता है। गर्भाशय संकुचनों तथा ऑक्सीटोसीन स्राव के बीच लगातार उद्दीपक प्रतिवर्त के कारण यह संकुचन अत्याधिक तीव्र होता जाता है। इसके परिणामस्वरूप शिशु माता के गर्भाशय से जनन नाल द्वारा बाहर आ जाता है, इस प्रकार प्रसव की क्रिया सम्पन्न होती है।
D. जन्म की प्रक्रिया का आरम्भ गर्भ पीयूष तथा अधिवृक्क प्रणाली दोनों करता है। अधिवृक्क ग्रंथि एक बहुत महत्वपूर्ण ग्रंथि होती है। इसकी कमी से पीड़ित महिलाओं के गर्भवती होने की सम्भावना नहीं होती है। यदि वे ऐसा करते हैं, तो उनमें संचार संबंधी गड़बड़ी और कार्बोहाइड्रेट, इलेक्ट्रोलाइड और द्रवअसंतुलन से पीड़ित होने की अधिक प्रवृत्ति होती है क्योंकि पानी, सोडियम, पोटैशियम, क्लोराइड और ग्लूकोज के चयापचय में अधिवृक्क ग्रंंथियाँ महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। ऐसे रोगी और उनके बच्चे यदि गर्भ के दौरान हार्मोनल थेरेपी प्राप्त करते हैं तो वे अच्छा करते हैं। गर्भ पीयूष ग्रंथि से ऑक्सीटोसीन गर्भाशय पेशी पर क्रिया करता है और इसके कारण गर्भाशय में तीव्र संकुचन प्रारम्भ हो जाता है। गर्भाशय संकुचनों तथा ऑक्सीटोसीन स्राव के बीच लगातार उद्दीपक प्रतिवर्त के कारण यह संकुचन अत्याधिक तीव्र होता जाता है। इसके परिणामस्वरूप शिशु माता के गर्भाशय से जनन नाल द्वारा बाहर आ जाता है, इस प्रकार प्रसव की क्रिया सम्पन्न होती है।

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जन्म की प्रक्रिया का आरम्भ गर्भ पीयूष तथा अधिवृक्क प्रणाली दोनों करता है। अधिवृक्क ग्रंथि एक बहुत महत्वपूर्ण ग्रंथि होती है। इसकी कमी से पीड़ित महिलाओं के गर्भवती होने की सम्भावना नहीं होती है। यदि वे ऐसा करते हैं, तो उनमें संचार संबंधी गड़बड़ी और कार्बोहाइड्रेट, इलेक्ट्रोलाइड और द्रवअसंतुलन से पीड़ित होने की अधिक प्रवृत्ति होती है क्योंकि पानी, सोडियम, पोटैशियम, क्लोराइड और ग्लूकोज के चयापचय में अधिवृक्क ग्रंंथियाँ महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। ऐसे रोगी और उनके बच्चे यदि गर्भ के दौरान हार्मोनल थेरेपी प्राप्त करते हैं तो वे अच्छा करते हैं। गर्भ पीयूष ग्रंथि से ऑक्सीटोसीन गर्भाशय पेशी पर क्रिया करता है और इसके कारण गर्भाशय में तीव्र संकुचन प्रारम्भ हो जाता है। गर्भाशय संकुचनों तथा ऑक्सीटोसीन स्राव के बीच लगातार उद्दीपक प्रतिवर्त के कारण यह संकुचन अत्याधिक तीव्र होता जाता है। इसके परिणामस्वरूप शिशु माता के गर्भाशय से जनन नाल द्वारा बाहर आ जाता है, इस प्रकार प्रसव की क्रिया सम्पन्न होती है।