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Q: Which of the following Indian mathematicians are known as as founders of numerical analysis? निम्नलिखित में से किन भारतीय गणितज्ञों को ‘संख्यात्मक विश्लेषण’ के संस्थापक के रूप में जाना जाता है? (i) Ramanujan/रामानुजन (ii) Bhaskaracharya/भास्कराचार्य (iii) Varahmihir/वराहमिहिर (iv) Arybhatta/आर्यभट्ट Choose the correct option/सही विकल्प चुनें।
  • A. (i) and (iv)/(i) और (iv)
  • B. (i) and (iii)/(i) और (iii)
  • C. (ii) and (iv)/(ii) और (iv)
  • D. (ii) and (iii)/(ii) और (iii)
Correct Answer: Option B - श्रीनिवास रामानुजन का संख्याओं के विश्लेषणात्मक सिद्धान्त, दीर्घवृत्तीय कार्य, सतत् भिन्न और अनंत शृंखला जैसे गणितीय सिद्धान्तों में योगदान इमेटिक्स की दुनिया में उल्लेखनीय माना जाता है। उनके सिद्धान्तों ने 21 वीं सदी के गणित को बदलने में योगदान दिया हैं। वराहमिहिर ने ‘संख्यात्मक विश्लेषण’ के अन्तर्गत शून्य और ऋणात्मक संख्याओं के बीजगणित गुण विकसित किये। वह पास्कल त्रिभुज का एक अलग रूप खोजने वाले पहले गणितज्ञों मे से एक थे। इसका उपयोग द्विपद गुणांक की गणना करने के लिए किया गया था।
B. श्रीनिवास रामानुजन का संख्याओं के विश्लेषणात्मक सिद्धान्त, दीर्घवृत्तीय कार्य, सतत् भिन्न और अनंत शृंखला जैसे गणितीय सिद्धान्तों में योगदान इमेटिक्स की दुनिया में उल्लेखनीय माना जाता है। उनके सिद्धान्तों ने 21 वीं सदी के गणित को बदलने में योगदान दिया हैं। वराहमिहिर ने ‘संख्यात्मक विश्लेषण’ के अन्तर्गत शून्य और ऋणात्मक संख्याओं के बीजगणित गुण विकसित किये। वह पास्कल त्रिभुज का एक अलग रूप खोजने वाले पहले गणितज्ञों मे से एक थे। इसका उपयोग द्विपद गुणांक की गणना करने के लिए किया गया था।

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श्रीनिवास रामानुजन का संख्याओं के विश्लेषणात्मक सिद्धान्त, दीर्घवृत्तीय कार्य, सतत् भिन्न और अनंत शृंखला जैसे गणितीय सिद्धान्तों में योगदान इमेटिक्स की दुनिया में उल्लेखनीय माना जाता है। उनके सिद्धान्तों ने 21 वीं सदी के गणित को बदलने में योगदान दिया हैं। वराहमिहिर ने ‘संख्यात्मक विश्लेषण’ के अन्तर्गत शून्य और ऋणात्मक संख्याओं के बीजगणित गुण विकसित किये। वह पास्कल त्रिभुज का एक अलग रूप खोजने वाले पहले गणितज्ञों मे से एक थे। इसका उपयोग द्विपद गुणांक की गणना करने के लिए किया गया था।