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Q: Which of the following constitute Capital Account? g the codes given below. नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए।
  • A. 1, 2 and 3/1, 2 और 3
  • B. 1, 2 and 4/1, 2 और 4
  • C. 2, 3 and 4/2, 3 और 4
  • D. 1, 3 and 4/1, 3 और 4
Correct Answer: Option B - निजी प्रेषित धन चालू खाते की रचना करता है, जबकि विदेशी ऋण, प्रत्यक्ष विदेशी निवेश, पोर्टफोलियो निवेशन पूंजीगत खाते की रचना करते हैं। पूंजीगत लेखा सरकार की परिसम्पत्तियों और दायित्वों से संबंधित राशियों का लेखा है जो पूंजी में होने वाले परिवर्तनों को दर्शाता है। इसकी रचना पूंजीगत प्राप्तियों व व्ययों से होती है। पूंजीगत प्राप्तियों से आशय उन प्राप्तियों से है, जो सरकार के दायित्वों का सृजन करती है अथवा वित्तीय परिसम्पत्तियों को कम करती है; यथा—सार्वजनिक ऋण, विदेशों तथा अंतर्राष्ट्रीय संगठनों से लिया गया ऋण एवं सरकार द्वारा दिये गये ऋणों की वसूली आदि। पूंजीगत व्ययों से तात्पर्य उन व्ययों से है, जो भौतिक या वित्तीय परिसम्पत्तियों का सृजन करते हैं या सरकार के दायित्वों में कमी लाते हैं, जैसे–भूमि अधिग्रहण, भवन निर्माण, मशीनरी, शेयरों में निवेश और सरकार द्वारा राज्यों को दिये गये ऋण आदि।
B. निजी प्रेषित धन चालू खाते की रचना करता है, जबकि विदेशी ऋण, प्रत्यक्ष विदेशी निवेश, पोर्टफोलियो निवेशन पूंजीगत खाते की रचना करते हैं। पूंजीगत लेखा सरकार की परिसम्पत्तियों और दायित्वों से संबंधित राशियों का लेखा है जो पूंजी में होने वाले परिवर्तनों को दर्शाता है। इसकी रचना पूंजीगत प्राप्तियों व व्ययों से होती है। पूंजीगत प्राप्तियों से आशय उन प्राप्तियों से है, जो सरकार के दायित्वों का सृजन करती है अथवा वित्तीय परिसम्पत्तियों को कम करती है; यथा—सार्वजनिक ऋण, विदेशों तथा अंतर्राष्ट्रीय संगठनों से लिया गया ऋण एवं सरकार द्वारा दिये गये ऋणों की वसूली आदि। पूंजीगत व्ययों से तात्पर्य उन व्ययों से है, जो भौतिक या वित्तीय परिसम्पत्तियों का सृजन करते हैं या सरकार के दायित्वों में कमी लाते हैं, जैसे–भूमि अधिग्रहण, भवन निर्माण, मशीनरी, शेयरों में निवेश और सरकार द्वारा राज्यों को दिये गये ऋण आदि।

Explanations:

निजी प्रेषित धन चालू खाते की रचना करता है, जबकि विदेशी ऋण, प्रत्यक्ष विदेशी निवेश, पोर्टफोलियो निवेशन पूंजीगत खाते की रचना करते हैं। पूंजीगत लेखा सरकार की परिसम्पत्तियों और दायित्वों से संबंधित राशियों का लेखा है जो पूंजी में होने वाले परिवर्तनों को दर्शाता है। इसकी रचना पूंजीगत प्राप्तियों व व्ययों से होती है। पूंजीगत प्राप्तियों से आशय उन प्राप्तियों से है, जो सरकार के दायित्वों का सृजन करती है अथवा वित्तीय परिसम्पत्तियों को कम करती है; यथा—सार्वजनिक ऋण, विदेशों तथा अंतर्राष्ट्रीय संगठनों से लिया गया ऋण एवं सरकार द्वारा दिये गये ऋणों की वसूली आदि। पूंजीगत व्ययों से तात्पर्य उन व्ययों से है, जो भौतिक या वित्तीय परिसम्पत्तियों का सृजन करते हैं या सरकार के दायित्वों में कमी लाते हैं, जैसे–भूमि अधिग्रहण, भवन निर्माण, मशीनरी, शेयरों में निवेश और सरकार द्वारा राज्यों को दिये गये ऋण आदि।