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निर्देश : नीचे दिए गद्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों (प्र.सं. 295-301) के सही/सबसे उपयुक्त उत्तर वाले विकल्प को चुनिए। रिक्शे पर मीरा के साथ हँसती-बोलती ऋतु घर पहुँची। सीढ़ियॉ। चढ़ने लगी तो कुछ झगड़ने की आवाजें सुनाई दी। ऊपर पहुँची तो देखा, दोनों आजू-बाजू वाली पड़ोसनें झगड़ रही थी। अपने दरवाजे के पास खड़ी होकर उसने कुछ देर उनकी बातें सुनी तो झगड़े का कारण समझ में आया। एक की महरी ने घर साफ करके कचरा दूसरी के दरवाजे की ओर फेंक दिया था, इसी बात का झगड़ा था। ऋतु ने दोनों को समझाया-बुझाया। आखिरकार कचरा फेंकने वाली महरी को बुलाया गया। उसने झाडू थामी और कचरा सीढ़ी की ओर धकेल दिया। फिर वह महरी अंदर चली गई। दोनों पड़ोसनों ने भी अंदर जाकर अपने-अपने द्वार बंद कर लिए। ऋतु खड़ी-खड़ी देखती रही। जो सीढ़ी पहले से ही गंदी थी वह और भी गंदी हो गई। रेत का तो साम्राज्य ही था। कहीं बादाम के छिलके पड़े थे तो कहीं चूसी हुई इख के लच्छे कहीं बालों की गुच्छा उड़ रहा था तो कहीं कुछ और। मन वितृष्णा से भर उठा। सोचा, इस सीढ़ी से चढ़कर सब अपने घर तक आते हैं, इससे उतरकर दफ्तर, बाजार आदि अपनी इच्छित जगहों पर जाते हैं, पर इसे कोई साफ नहीं करता। उलटे सब इस पर कचरा फेंक देते हैं। साझे की सीढ़ी है न! गंदगी बिखेरने का हक सबको मिला है और साफ करने का कर्तव्य किसी का नहीं है। स्वच्छता तो जैसे अनबुझी तृष्णा हो गई। ऋतु का मन घृणा से भर गया, क्योंकि