Correct Answer:
Option D - मध्य रेखा विधि (Centre line Method):- यह विधि एक समान अनुप्रस्थ काट वाले खण्ड के लिए उपयुक्त है। इस विधि में सम्पूर्ण मध्य रेखा की लम्बाई में चौड़ाई तथा गहराई का गुणा करके किसी कार्य की मात्रा ज्ञात कर लेते हैं। मध्य रेखा विधि द्वारा प्राक्कलन शीघ्र तथा कम शुद्ध प्राप्त होता है। नहरोें के लिए सड़कों के प्राक्कलन की मध्य रेखा विधि सबसे उपयुक्त है।
बाहर से बाहर व अन्दर से अन्दर विधि या लम्बी छोटी दीवार विधि (Long wall short wall method)-
■ इस विधि में बाहर से बाहर दीवार की लम्बाई को लम्बी दीवार तथा अन्दर से अन्दर दीवार की लम्बाई को छोटी दीवार कहते है।
■ इस विधि में लम्बी दीवार की नींव में लम्बाई अधिकतम तथा छोटी दीवार की नींव लम्बाई न्यूनतम होती है। परन्तु जैसे-जैसे कुर्सी की तरफ आते है लम्बी दीवार की लम्बाई घटती जाती है, तथा छोटी दीवार की लम्बाई बढ़ती चली जाती है।
D. मध्य रेखा विधि (Centre line Method):- यह विधि एक समान अनुप्रस्थ काट वाले खण्ड के लिए उपयुक्त है। इस विधि में सम्पूर्ण मध्य रेखा की लम्बाई में चौड़ाई तथा गहराई का गुणा करके किसी कार्य की मात्रा ज्ञात कर लेते हैं। मध्य रेखा विधि द्वारा प्राक्कलन शीघ्र तथा कम शुद्ध प्राप्त होता है। नहरोें के लिए सड़कों के प्राक्कलन की मध्य रेखा विधि सबसे उपयुक्त है।
बाहर से बाहर व अन्दर से अन्दर विधि या लम्बी छोटी दीवार विधि (Long wall short wall method)-
■ इस विधि में बाहर से बाहर दीवार की लम्बाई को लम्बी दीवार तथा अन्दर से अन्दर दीवार की लम्बाई को छोटी दीवार कहते है।
■ इस विधि में लम्बी दीवार की नींव में लम्बाई अधिकतम तथा छोटी दीवार की नींव लम्बाई न्यूनतम होती है। परन्तु जैसे-जैसे कुर्सी की तरफ आते है लम्बी दीवार की लम्बाई घटती जाती है, तथा छोटी दीवार की लम्बाई बढ़ती चली जाती है।