Correct Answer:
Option B - बाणभट्ट पुष्यभूति वंश के राजा हर्ष के दरबारी कवि थे जिसने अपनी रचना हर्षचरित में अंतिम मौर्य शासक बृहद्रथ को प्रज्ञादुर्बल/बुद्धिहीन शासक कहा है। इनकी अन्य पुस्तकें कादम्बरी, मुकुताडितक, चण्डीशतक है। कावेल एवं थामस ने हर्षचरित का अंग्रेजी में अनुवाद किया है। राजानक शंकरकंठ, रंगनाथ, रूचक तथा शंकर हर्षचरित के टीकाकार थे।
B. बाणभट्ट पुष्यभूति वंश के राजा हर्ष के दरबारी कवि थे जिसने अपनी रचना हर्षचरित में अंतिम मौर्य शासक बृहद्रथ को प्रज्ञादुर्बल/बुद्धिहीन शासक कहा है। इनकी अन्य पुस्तकें कादम्बरी, मुकुताडितक, चण्डीशतक है। कावेल एवं थामस ने हर्षचरित का अंग्रेजी में अनुवाद किया है। राजानक शंकरकंठ, रंगनाथ, रूचक तथा शंकर हर्षचरित के टीकाकार थे।