Correct Answer:
Option C - मनुष्य की विभिन्न परिस्थितियों का सन्तुलित आहार पर प्रभाव पड़ता है। प्रत्येक व्यक्ति के लिए आहार से ऊर्जा व ताप उत्पन्न करने वाले, शरीर निर्माण करने वाले तथा स्वास्थ्य रक्षा करने वाले भोज्य तत्वों को प्राप्त करना आवश्यक है, परन्तु सभी व्यक्तियों को इन तीनों प्रकार के तत्वों की समान आवश्यकता नहीं होती। विभिन्न व्यक्तियों की आयु, लिंग, परिश्रम और ऋतु के अनुसार ही इन पोषक तत्वों को भिन्न-भिन्न मात्राओं की आवश्यकता होती है। शिशु या बालक और वयस्क के, स्त्री व पुरुष के, शारीरिक व मानसिक कार्य की प्रधानता वाले व्यक्तियों के, शीत प्रधान और उष्ण देशों के निवासियों के तथा शीतकाल और ग्रीष्मकाल के आहार में अन्तर रहता हैं। इनके अंतर के कारण स्पष्ट ही हैं, उदाहरणार्थ- किसी स्थिति व अवस्था में शरीर निर्माण करने वाला पोषक तत्व प्रोटीन अधिक चाहिए तो दूसरों मे ऊर्जा उत्पन्न करने वाला तत्व कार्बोहाइड्रेट अधिक चाहिए। आहार को जलवायु कारक, स्वास्थ्य की स्थिति और विकास, खाने की आदतें और सामाजिक रीति-रिवाज़ सदैव प्रभावित करते हैं।
C. मनुष्य की विभिन्न परिस्थितियों का सन्तुलित आहार पर प्रभाव पड़ता है। प्रत्येक व्यक्ति के लिए आहार से ऊर्जा व ताप उत्पन्न करने वाले, शरीर निर्माण करने वाले तथा स्वास्थ्य रक्षा करने वाले भोज्य तत्वों को प्राप्त करना आवश्यक है, परन्तु सभी व्यक्तियों को इन तीनों प्रकार के तत्वों की समान आवश्यकता नहीं होती। विभिन्न व्यक्तियों की आयु, लिंग, परिश्रम और ऋतु के अनुसार ही इन पोषक तत्वों को भिन्न-भिन्न मात्राओं की आवश्यकता होती है। शिशु या बालक और वयस्क के, स्त्री व पुरुष के, शारीरिक व मानसिक कार्य की प्रधानता वाले व्यक्तियों के, शीत प्रधान और उष्ण देशों के निवासियों के तथा शीतकाल और ग्रीष्मकाल के आहार में अन्तर रहता हैं। इनके अंतर के कारण स्पष्ट ही हैं, उदाहरणार्थ- किसी स्थिति व अवस्था में शरीर निर्माण करने वाला पोषक तत्व प्रोटीन अधिक चाहिए तो दूसरों मे ऊर्जा उत्पन्न करने वाला तत्व कार्बोहाइड्रेट अधिक चाहिए। आहार को जलवायु कारक, स्वास्थ्य की स्थिति और विकास, खाने की आदतें और सामाजिक रीति-रिवाज़ सदैव प्रभावित करते हैं।