निर्देश–नीचे दिए गए गद्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों (1 से 9 तक) के सबसे उपयुक्त उत्तर वाले विकल्प को चुनिए– मानव के मर्मस्थल में परोपकार और त्याग जैसे सद्गुणों की जागृति तभी हो पाती है, जब वह अपने तुच्छ भौतिक जीवन को नगण्य समझकर उत्साह-उमंग के साथ दूसरों की सेवा-सुश्रूषा तथा सत्कार करता है। यह कठोर सत्य है कि हम भौतिक रूप में इस संसार में सीमित अवधि तक ही रहेंगे। हमारी मृत्यु के बाद हमारे निकट सम्बन्धी, मित्र, बन्धु-बांधव जीवनभर हमारे लिए शोकाकुल और प्रेमाकुल भी नहीं रहेंगे। दुख मिश्रित इस निर्बल भावना पर विजय पाने के लिए तब हमारे अन्तर्मन में एक विचार उठता है कि क्यों न हम अपने सत्कर्मों और सद्गुणों का प्रकाश फैलाकर सदा-सदा के लिए अमर हो जाएँ। सेवक-प्रवृत्ति अपनाकर हम ऐसा अवश्य कर सकते हैं। अपने नि:स्वार्थ व्यक्तित्व और परहित कर्मों के बल पर हम हमेशा के लिए मानव जीवन हेतु उत्प्रेरणा बन सकते हैं। अनुपम मनुष्य जीवन को सद्गति प्रदान करने के लिए यह विचार नया नहीं है। ऐसे विचार सज्जन मनुष्यों के अन्तर्मन में सदा उठते रहे हैं तथा इन्हें अपनाकर वे दुनिया में अमर भी हो गए। इस धरा पर स्थायी रूप में नहीं रहने पर भी ऐसे परहितकारी कालांतर तक पूजे जाते रहेंगे। अमूल्य मनुष्य जीवन की सर्वश्रेष्ठ शिक्षा यही है। यही सीखकर मनुष्य का जीवन आनंदमय और समृद्धिशाली हो सकता है। यदि इस प्रकार मानव जीवन उन्नत होता है तो यह संपूर्ण संसार स्वर्गिक विस्तार ग्रहण कर लेगा। किसी भी मानव को अध्यात्मिकता का जो अंतिम ज्ञान मिलेगा, वह भी यही शिक्षा देगा कि धर्म-कर्म का उद्देश्य सत्कर्मों और सद्गुणों की ज्योति फैलाना ही है। ‘नि:स्वार्थ’ शब्द का उपयुक्त विपरीतार्थी शब्द है–
उस प्रसिद्ध यूरोपीय चित्रकार का नाम बताएँ जो नारी-आकृतियों में सदैव लम्बी गर्दन का चित्रांकन करता था।
Which of the following is a communication service provided by the internet? निम्नलिखित में से कौन सी इंटरनेट द्वारा प्रदान की जाने वाली संचार सेवा है?
किसी समद्विबाहु त्रिभुज का परिमाप 91 cm है और इसका आधार इसकी प्रत्येक समान भुजाओं से 1¼ गुना है। इसके आधार की लंबाई (cm में) ज्ञात करें।
CSR, ESG और सस्टेनेबिलिटी पर IICA-WNS 'वाइब्रैंट' कार्यक्रम का शुभारंभ किस शहर में किया गया है?
दिए गए परिच्छेद को ध्यान से पढ़ें और तय करें कि विकल्पों में से कौन सा निष्कर्ष इस परिच्छेद से तार्किक रूप से मेल खाता है? एक टीवी शो में, एक प्रसिद्ध पोषण विद् (नूट्रिशनिस्ट) ने कहा कि नाश्ते के लिए पेश की जाने वाली विविध प्रकार की वस्तुओं में, मूसली में सामान्य अन्न की तुलना में अधिक पोषण होता है। उन्होंने यह भी कहा कि दलिया रोटी की तुलना में स्वास्थ्यवर्धक है। लेकिन हाल ही में एक अन्न कंपनी के विज्ञापन का कहना है कि कॉर्नफ्लेक्स (मकाई) जैसे अन्न सादे मूसली की तुलना में पोषण में समृद्ध हैं। विज्ञापन में दी गई गलत जानकारी को लेकर उपभोक्ता सोशल मीडिया और कंपनी की वेबसाइट पर कड़ी आलोचना कर रहे हैं।
किसे हाल ही में एम.एस. स्वामीनाथन पुरस्कार से सम्मानित किया गया?
Find the unit digit in the product गुणनफल 6812 × 3528 × 3179 × 4324 में इकाई अंक ज्ञात कीजिए।
सैन्य एक्सरसाइज 'वज्र प्रहार' भारत और किस देश की बीच आयोजित किया जाता है?
दिए गए गद्यांश के आधार पर प्रश्न के उत्तर दीजिए। विद्यासागर महान विद्वान और समाज सुधारक थे। यद्यपि वह संस्कृत के बहुत बड़े विद्वान थे तथापि उनके दिमाग के दरवा़जे पाश्चात्य चिंतन में जो कुछ सर्वोंत्तम था उसके लिए खुले हुए थे। वे भारतीय और पाश्चात्य संस्कृति के एक सुखद संयोग का प्रतिनिधित्त्व करते थे। उन्होंने सरकारी सेवा से त्यागपत्र दे दिया क्योंकि वह अनु्रचित सरकारी हस्तक्षेप बर्दाश्त नहीं कर सके। उन्होेंने संस्कृत कॉलेज के दरवा़जे गैर-ब्राह्मण विद्यार्थियों के लिए खोल दिए क्योंकि वह संस्कृत के अध्ययन पर ब्राह्मण जाति के तत्कालीन एकाधिकार के विरोधी थे। विद्यासागर को उनके देशवासी भारत की पद दलित नारी जाति को ऊँचा उठाने में उनके योगदान के कारण आज भी याद करते हैं। उन्होंने विधवा पुनर्विवाह के लिए लंबा संघर्ष चलाया। हमारे देश की उच्च जातियों मे पहला ़कानूनी हिंदू विधवा पुनर्विवाह कोलकाता में 7 दिसंबर 1856 को विद्यासागर की प्रेरणा से और उनकी ही देखरेख में हुआ। विधवा पुनर्विवाह की वकालत करने के कारण विद्यासागर का पोंगापंथी हिंदुओं की कटु शत्रुता का सामना करना पड़ा। उनके इस काम में जरुरतमंद दम्पत्तियों की आर्थिक सहायता भी शामिल थी। विद्यासागर ने 1850 में बाल- विवाह का विरोध किया। स्कूलों के सरकारी निरीक्षक की हैसियत से उन्होंनें 35 बालिका विद्यालयों की स्थापना की। बेथुन स्वूâल के मंत्री की हैसियत से वह उच्च नारी शिक्षा के अग्रदूतों में से थे। बेथुन स्कूल की स्थापना 1849 में कलकत्ता में हुई। लड़कियों को आधुनिक शिक्षा पर जोर देने के कारण उनके प्रयास सफल नहीं हो सके। अनेक लोगों का ख्याल था कि पाश्चात्य शिक्षा पाने वाली लड़कियाँ अपने पतियों को अपना गुलाम बना देंगीं। ‘‘ संस्कृत विद्वान होने के बाद भी उनके दिमाग के दरवाजे पाश्चात्य चिंतन में जो कुछ सर्वोत्तम था उसके लिए खुले हुए थे।’’ से क्या तात्पर्य है?
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