Explanations:
बलबन के विषय में कहा गया है कि उसने रक्त और लौह की नीति अपनाई थी। बलबन के राजत्व सिद्धांत की दो मुख्य विशेषताएं थी। प्रथम सुल्तान का पद ईश्वर द्वारा प्रदत्त होता है और द्वितीय सुल्तान का निरंकुश होना अनिवार्य है। उसके अनुसार सुल्तान पृथ्वी पर ईश्वर का प्रतिनिधि नियामत-ए-खुदाई है और उसका स्थान पैंगबर के पश्चात है। सुल्तान को कार्य करने की प्रेरणा और शक्ति ईश्वर से प्राप्त होती है। सुल्तान जिल्ले इलाही अर्थात ईश्वर का प्रतिबिंब है। बलबन ने ही अपने दरबार में फारसी त्यौहार नौरोज आरंभ करवाया था। इसने इल्तुतमिश द्वारा गठित तुर्कान-ए-चहलगानी के गठन को समाप्त कर दिया था।