Correct Answer:
Option B - ‘स्तूप’ शब्द का पहली बार उल्लेख ऋग्वेद में मिलता है जिसका अर्थ ढेर या गोलाकार संरचना है। ऋग्वेद के दो ब्राह्मण ग्रन्थ हैं– ऐतरेय और कौषीतकी। ऋग्वेद की पाँच प्रधान शाखाएँ साकल, वाष्कल, आश्वलायन, शांखायन और माण्डूकायन। प्रकाशित ऋग्वेद संहिता का संबंध साकल शाखा से है। ऋग्वेद की टीका चौदहवीं सदी महान विद्वान सायण द्वारा लिखी गयी। सायण को विजयनगर साम्राज्य के संस्थापकों हरिहर और बुक्का द्वारा संरक्षण प्राप्त था। वर्ण व्यवस्था का प्रथम उल्लेख ऋग्वेद के 10 वें मण्डल में पुरूष सूक्त में मिलता है। अत: वर्ण शब्द पहली बार ऋग्वेद में ही प्रयुक्त हुआ है। ‘वेद त्रयी’ में मुख्य रूप से ऋग्वेद, सामवेद व यजुर्वेद की गणना की जाती है, इन्हीं तीनों वेदों को ‘वेद त्रयी’ कहा गया। ऋग्वेद में सर्वाधिक 250 सूक्त इन्द्र को समर्पित है, इसके पश्चात 200 सूक्त अग्नि को समर्पित है
B. ‘स्तूप’ शब्द का पहली बार उल्लेख ऋग्वेद में मिलता है जिसका अर्थ ढेर या गोलाकार संरचना है। ऋग्वेद के दो ब्राह्मण ग्रन्थ हैं– ऐतरेय और कौषीतकी। ऋग्वेद की पाँच प्रधान शाखाएँ साकल, वाष्कल, आश्वलायन, शांखायन और माण्डूकायन। प्रकाशित ऋग्वेद संहिता का संबंध साकल शाखा से है। ऋग्वेद की टीका चौदहवीं सदी महान विद्वान सायण द्वारा लिखी गयी। सायण को विजयनगर साम्राज्य के संस्थापकों हरिहर और बुक्का द्वारा संरक्षण प्राप्त था। वर्ण व्यवस्था का प्रथम उल्लेख ऋग्वेद के 10 वें मण्डल में पुरूष सूक्त में मिलता है। अत: वर्ण शब्द पहली बार ऋग्वेद में ही प्रयुक्त हुआ है। ‘वेद त्रयी’ में मुख्य रूप से ऋग्वेद, सामवेद व यजुर्वेद की गणना की जाती है, इन्हीं तीनों वेदों को ‘वेद त्रयी’ कहा गया। ऋग्वेद में सर्वाधिक 250 सूक्त इन्द्र को समर्पित है, इसके पश्चात 200 सूक्त अग्नि को समर्पित है