Correct Answer:
Option B - स्थूल कंक्रीट (mass concrete)- कंक्रीट की विशाल व भारी सरंचनाओं, जैसे बाँध, पुलों, नदी-गोदी कार्यों में एक ही समय में बड़ी मात्रा में कंक्रीट डालनी पड़ती है। इसे स्थूल कंक्रीट कहते हैं।
■ इस कंक्रीट का स्लम्प (अवपात) (25 से 75mm) रखा जाताह w और मोटा मिलावा अधिकतम 150mm माप का प्रयोग किया जाता है। कंक्रीट मिश्रण काफी सख्त प्रकार का रखा जाता है, जिसकी जिमज्जन प्रकार के कम्पकों (Immersion type vibrator) से कुटाई की जाती है।
■ बड़ी मात्रा में एक साथ कंक्रीट डालने के कारण, जलयोजन पर कंक्रीट पिण्ड से बड़ी मात्रा में ऊष्मा निकलती है और कंक्रीट का तापक्रम अत्यधिक बढ़ जाता है। इससे कंक्रीट कार्य में संकुचन दरारे पड़ने की संभावना बन जाती है। अत: कंक्रीट की ऊष्मा के ह्रास के लिए कंक्रीट पिण्ड में पाइप दबा दिये जाते हैं, जिनमें ठण्डा पानी प्रवाहित किया जाता है। संकुचन दरारों को रोकने के लिए कंक्रीट में अल्प ऊष्मा सीमेंट (Low heat cement) में ट्राइ-कैल्शियम एल्युमिनेट की मात्रा कम की जाती है, का उपयोग करते हैं।
B. स्थूल कंक्रीट (mass concrete)- कंक्रीट की विशाल व भारी सरंचनाओं, जैसे बाँध, पुलों, नदी-गोदी कार्यों में एक ही समय में बड़ी मात्रा में कंक्रीट डालनी पड़ती है। इसे स्थूल कंक्रीट कहते हैं।
■ इस कंक्रीट का स्लम्प (अवपात) (25 से 75mm) रखा जाताह w और मोटा मिलावा अधिकतम 150mm माप का प्रयोग किया जाता है। कंक्रीट मिश्रण काफी सख्त प्रकार का रखा जाता है, जिसकी जिमज्जन प्रकार के कम्पकों (Immersion type vibrator) से कुटाई की जाती है।
■ बड़ी मात्रा में एक साथ कंक्रीट डालने के कारण, जलयोजन पर कंक्रीट पिण्ड से बड़ी मात्रा में ऊष्मा निकलती है और कंक्रीट का तापक्रम अत्यधिक बढ़ जाता है। इससे कंक्रीट कार्य में संकुचन दरारे पड़ने की संभावना बन जाती है। अत: कंक्रीट की ऊष्मा के ह्रास के लिए कंक्रीट पिण्ड में पाइप दबा दिये जाते हैं, जिनमें ठण्डा पानी प्रवाहित किया जाता है। संकुचन दरारों को रोकने के लिए कंक्रीट में अल्प ऊष्मा सीमेंट (Low heat cement) में ट्राइ-कैल्शियम एल्युमिनेट की मात्रा कम की जाती है, का उपयोग करते हैं।