Correct Answer:
Option D - वायरिंग की विधियाँ-
ट्री प्रणाली–इस प्रणाली में किसी वृक्ष शाखाओं उपशाखाओं की भाँति ही मेन लाइन से अनेक उप-परिपथ तैयार किये जाते हैं।
ज्वॉइंट बाक्स प्रणाली–इस विधि में मेन-लाइन के उपयुक्त स्थलों से केबिल में जोड़ लगाकर उप-परिपथ तैयार किया जाता है। जोड़ों के ऊपर टेप लपेट दी जाती है।
सिस्टम में लूप–किसी भवन में विभिन्न कक्षों में डी.सी. प्रणाली से वायरिंग स्थापित करने के बाद लैम्पों, ट्यूबलाइटों, पंखों, सर्किटों आदि की वायरिंग, लूपिंग विधि द्वारा स्थापित की जाती है।
D. वायरिंग की विधियाँ-
ट्री प्रणाली–इस प्रणाली में किसी वृक्ष शाखाओं उपशाखाओं की भाँति ही मेन लाइन से अनेक उप-परिपथ तैयार किये जाते हैं।
ज्वॉइंट बाक्स प्रणाली–इस विधि में मेन-लाइन के उपयुक्त स्थलों से केबिल में जोड़ लगाकर उप-परिपथ तैयार किया जाता है। जोड़ों के ऊपर टेप लपेट दी जाती है।
सिस्टम में लूप–किसी भवन में विभिन्न कक्षों में डी.सी. प्रणाली से वायरिंग स्थापित करने के बाद लैम्पों, ट्यूबलाइटों, पंखों, सर्किटों आदि की वायरिंग, लूपिंग विधि द्वारा स्थापित की जाती है।