Correct Answer:
Option C - बेल्लन घर्षण (Rolling Friction)– किसी वस्तु पर लगाया गया वह बाह्य बल जो किसी वस्तु को दूसरे के सापेक्ष लुढ़काने की प्रवृत्ति रखता है, लुढ़काऊ बल कहलाता है, तथा दोनों की सतहों के बीच लगने वाले घर्षण बल को रोलिंग घर्षण कहते हैं।
कोई पिण्ड दूसरे पिण्ड की सतह पर लुढ़कता है तो इसकी गति का विरोध करने वाले बल को बेल्लन घर्षण कहा जाता है। जैसे सड़क पर चलती हुई साइकिल या पटरी पर चलती हुई रेलगाड़ी पर बेल्लनी घर्षण ही लगता है।
∎ जब कोई वस्तु किसी सतह पर सरकती है तो दोनों के तलों के मध्य लगने वाला घर्षण बल सर्पी घर्षण बल कहलाता है।
स्थैतिक घर्षण– जब किसी वस्तु पर बाह्य बल कार्य करता है लेकिन फिर भी वस्तु गति नहीं करती है तो बल के विपरीत जो घर्षण बल कार्य करता है उसे स्थैतिक घर्षण बल कहते हैं। स्थैतिक घर्षण बल का परिमाण बाहरी आरोपित नैट बल के बराबर होता है जबकि दिशा उनके विपरीत होती है। यह बल एक स्वसमंजन बल है, जो कि आरोपित बल के बढ़ाने पर तब तक बढ़ता है जब तक कि आरोपित गति ठीक रूक न जाए।
C. बेल्लन घर्षण (Rolling Friction)– किसी वस्तु पर लगाया गया वह बाह्य बल जो किसी वस्तु को दूसरे के सापेक्ष लुढ़काने की प्रवृत्ति रखता है, लुढ़काऊ बल कहलाता है, तथा दोनों की सतहों के बीच लगने वाले घर्षण बल को रोलिंग घर्षण कहते हैं।
कोई पिण्ड दूसरे पिण्ड की सतह पर लुढ़कता है तो इसकी गति का विरोध करने वाले बल को बेल्लन घर्षण कहा जाता है। जैसे सड़क पर चलती हुई साइकिल या पटरी पर चलती हुई रेलगाड़ी पर बेल्लनी घर्षण ही लगता है।
∎ जब कोई वस्तु किसी सतह पर सरकती है तो दोनों के तलों के मध्य लगने वाला घर्षण बल सर्पी घर्षण बल कहलाता है।
स्थैतिक घर्षण– जब किसी वस्तु पर बाह्य बल कार्य करता है लेकिन फिर भी वस्तु गति नहीं करती है तो बल के विपरीत जो घर्षण बल कार्य करता है उसे स्थैतिक घर्षण बल कहते हैं। स्थैतिक घर्षण बल का परिमाण बाहरी आरोपित नैट बल के बराबर होता है जबकि दिशा उनके विपरीत होती है। यह बल एक स्वसमंजन बल है, जो कि आरोपित बल के बढ़ाने पर तब तक बढ़ता है जब तक कि आरोपित गति ठीक रूक न जाए।