Correct Answer:
Option B - चीनी यात्री शुंग-युन 518 ई. में भारत आया और उसने अपने तीन वर्षों की यात्रा में बौद्ध ग्रन्थों की प्रतियाँ प्राप्त की। ध्यातव्य है कि फाह्यान, ह्वेनसांग तथा इत्सिंग भी चीनी यात्री थे जिन्होंने भारत की यात्रा की। फाह्यान, चन्द्रगुप्त द्वितीय ‘विक्रमादित्य’ (375-415 ई.) के दरबार में आया। ह्ववेनसांग हर्षवर्धन के शासन काल में (629 ई. के लगभग) भारत आया था। भारत आने वाले चीनी यात्री–
(क) फाह्यान – भारत में आने वाला यह प्रथम चीनी यात्री था, जो चन्द्रगुप्त द्वितीय विक्रमादित्य के समय भारत की यात्रा की। इसने 15 वर्षों तक बौद्ध ग्रन्थों का अध्ययन किया।
(ख) शुंंग युन – यह 518 ईस्वी में भारत आया। इसने बंगाल व बिहार की तत्कालीन राजनीतिक, आर्थिक व धार्मिक स्थितियों का वर्णन किया।
(ग) इत्सिंग – यह 671–695 ईस्वी तक भारत में रहा। यह चीनी बौद्ध यात्री था जो नालन्दा विश्वविद्यालय में अध्ययनरत रहा तथा त्रिपिटकों की 400 प्रतियाँ अपने साथ ले गया।
(घ) मात्वालिन – 7वीं शताब्दी में भारत आया। इसने हर्षवर्धन की पूर्वी भारत आक्रमण अभियान का वर्णन किया है।
(ङ) चाउ-जू-कुआं - यह 1125–1254 ईस्वी तक भारत में रहा। इसने अपनी रचना में चू–फान–ची में चोल युगीन न्याय व्यवस्था का उल्लेख किया है।
B. चीनी यात्री शुंग-युन 518 ई. में भारत आया और उसने अपने तीन वर्षों की यात्रा में बौद्ध ग्रन्थों की प्रतियाँ प्राप्त की। ध्यातव्य है कि फाह्यान, ह्वेनसांग तथा इत्सिंग भी चीनी यात्री थे जिन्होंने भारत की यात्रा की। फाह्यान, चन्द्रगुप्त द्वितीय ‘विक्रमादित्य’ (375-415 ई.) के दरबार में आया। ह्ववेनसांग हर्षवर्धन के शासन काल में (629 ई. के लगभग) भारत आया था। भारत आने वाले चीनी यात्री–
(क) फाह्यान – भारत में आने वाला यह प्रथम चीनी यात्री था, जो चन्द्रगुप्त द्वितीय विक्रमादित्य के समय भारत की यात्रा की। इसने 15 वर्षों तक बौद्ध ग्रन्थों का अध्ययन किया।
(ख) शुंंग युन – यह 518 ईस्वी में भारत आया। इसने बंगाल व बिहार की तत्कालीन राजनीतिक, आर्थिक व धार्मिक स्थितियों का वर्णन किया।
(ग) इत्सिंग – यह 671–695 ईस्वी तक भारत में रहा। यह चीनी बौद्ध यात्री था जो नालन्दा विश्वविद्यालय में अध्ययनरत रहा तथा त्रिपिटकों की 400 प्रतियाँ अपने साथ ले गया।
(घ) मात्वालिन – 7वीं शताब्दी में भारत आया। इसने हर्षवर्धन की पूर्वी भारत आक्रमण अभियान का वर्णन किया है।
(ङ) चाउ-जू-कुआं - यह 1125–1254 ईस्वी तक भारत में रहा। इसने अपनी रचना में चू–फान–ची में चोल युगीन न्याय व्यवस्था का उल्लेख किया है।