Correct Answer:
Option A - मल पाइप(Soil Pipe)– यह पाइप फ्लश लैटरीन से वाहित-मल को निकालने के लिए लगाया जाता है। यह ढलवा लोहे, स्टोन-वेयर अथवा प्लास्टिक का बना होता है। इस पाइप का व्यास 100 mm से कम नहीं होना चाहिए। यह पाइप दीवार के बाहरी ओर उदग्र लगाया जाता है। पाइप के ऊपरी सिरे पर काउल लगाया जाता है।
वात पाइप (Vent Pipe)- वात पाइप, सीवर पाइपों में एकत्रित गैंसों को ऊपर वायुमण्डल में छोड़ने का कार्य करता है। इससे दूषित जल-निकासी के पाइपों में ताजी हवा का संचरण होता रहता है। ये पाइप जल-सील को साइफनी क्रिया तथा पश्च-दाब से सुरक्षित रखते हैं। इस पाइप का व्यास 50 mm होता है।
A. मल पाइप(Soil Pipe)– यह पाइप फ्लश लैटरीन से वाहित-मल को निकालने के लिए लगाया जाता है। यह ढलवा लोहे, स्टोन-वेयर अथवा प्लास्टिक का बना होता है। इस पाइप का व्यास 100 mm से कम नहीं होना चाहिए। यह पाइप दीवार के बाहरी ओर उदग्र लगाया जाता है। पाइप के ऊपरी सिरे पर काउल लगाया जाता है।
वात पाइप (Vent Pipe)- वात पाइप, सीवर पाइपों में एकत्रित गैंसों को ऊपर वायुमण्डल में छोड़ने का कार्य करता है। इससे दूषित जल-निकासी के पाइपों में ताजी हवा का संचरण होता रहता है। ये पाइप जल-सील को साइफनी क्रिया तथा पश्च-दाब से सुरक्षित रखते हैं। इस पाइप का व्यास 50 mm होता है।