Correct Answer:
Option D - आकस्मिकता (Contingency)– किसी मद का दर विश्लेषण करते समय, इसमें छोटे–मोटे पहलू अति आवश्यक खर्चे (जिनकी पूर्व गणना करने में कठिनाई आती हो) भी एक मुश्त (lump sum) जोड़े जाते हैं, ताकि दरें व्यवहारिक व न्याय संगत समझा जा सके। जिन्हें किसी भी उपशीर्षक के तहत वर्गीकृत नहीं किया जा सकता, लेकिन लागत जोड़ी जाती है। यह प्राक्कलन (Estimate) की राशि का 3 से 5% लिया जाता है।
■ किसी परियोजना बजट में आकस्मिकता भत्ते का उद्देश्य अप्रत्याशित लागतों और जोखिमों को पूर्ण करने के लिए किया जाता है।
D. आकस्मिकता (Contingency)– किसी मद का दर विश्लेषण करते समय, इसमें छोटे–मोटे पहलू अति आवश्यक खर्चे (जिनकी पूर्व गणना करने में कठिनाई आती हो) भी एक मुश्त (lump sum) जोड़े जाते हैं, ताकि दरें व्यवहारिक व न्याय संगत समझा जा सके। जिन्हें किसी भी उपशीर्षक के तहत वर्गीकृत नहीं किया जा सकता, लेकिन लागत जोड़ी जाती है। यह प्राक्कलन (Estimate) की राशि का 3 से 5% लिया जाता है।
■ किसी परियोजना बजट में आकस्मिकता भत्ते का उद्देश्य अप्रत्याशित लागतों और जोखिमों को पूर्ण करने के लिए किया जाता है।