Correct Answer:
Option D - गणित के शिक्षण शास्त्र को समझने हेतु हमें गणित की प्रकृति को समझना सबसे जरूरी हो जाता है। गणित के ज्ञान का आधार हमारी ज्ञानेन्द्रियाँ है। गणित में अमूर्त प्रत्यय को मूर्त रूप में परिवर्तित किया जाता है साथ ही उसकी व्याख्या भी की जाती है। गणित में संख्याएँ, स्थान, दिशा तथा मापन या माप तौल का ज्ञान प्राप्त किया जाता है। स्कूली शिक्षा के प्रारम्भिक चरण में गणित सीखने की प्रकृति के रूप में निम्नलिखित तथ्य इस प्रकार हैं–
(1) स्थूल एवं सन्दर्भ सम्बन्धी समझ ही गणित में बच्चों की शुरूआत की समझ है।
(2) मूर्त तत्वों के साथ हस्तकौशल बच्चे की गणितीय अवधारणा एवं प्रक्रिया को रचनात्मकता प्रदान करता है।
D. गणित के शिक्षण शास्त्र को समझने हेतु हमें गणित की प्रकृति को समझना सबसे जरूरी हो जाता है। गणित के ज्ञान का आधार हमारी ज्ञानेन्द्रियाँ है। गणित में अमूर्त प्रत्यय को मूर्त रूप में परिवर्तित किया जाता है साथ ही उसकी व्याख्या भी की जाती है। गणित में संख्याएँ, स्थान, दिशा तथा मापन या माप तौल का ज्ञान प्राप्त किया जाता है। स्कूली शिक्षा के प्रारम्भिक चरण में गणित सीखने की प्रकृति के रूप में निम्नलिखित तथ्य इस प्रकार हैं–
(1) स्थूल एवं सन्दर्भ सम्बन्धी समझ ही गणित में बच्चों की शुरूआत की समझ है।
(2) मूर्त तत्वों के साथ हस्तकौशल बच्चे की गणितीय अवधारणा एवं प्रक्रिया को रचनात्मकता प्रदान करता है।