Explanations:
जब किसी संरचनात्मक खण्ड में, बाह्य भार पड़ने से पूर्व, ऐसे प्रतिबलों को उत्पन्न कर दिया जाता है, जो भार (चल व अचल) पड़ने पर उपजे प्रतिबलों के विपरीत प्रकृति के हों, तो यह क्रिया पूर्व-प्रतिबलित कहलाती है और वह खण्ड पूर्व-प्रतिबलित अवयव कहलाता है। पूर्व प्रतिबलन द्वारा धरन के तनन क्षेत्र में, बाह्य भार पड़ने से पहले ही यांत्रिक विधि से सम्पीडन प्रतिबल उत्पन्न कर दिये जाते हैं, जो भार पड़ने पर उत्पन्न तनन प्रतिबलों को पूर्णत: रोधित कर देते हैं।