Correct Answer:
Option A - ब्रिटिश काल में कुछ वर्षों को छोड़कर सामान्यत: भारत का व्यापार संतुलन अनुकूल था। चूँकि औद्योगिक क्रांति के कारण ब्रिटेन को अपने उद्योग के लिए कच्चे माल की आवश्यकता थी और भारत उस काल में ब्रिटेन को कच्चे माल का प्रमुख निर्यातक देश था। अत: व्यापार संतुलन अधिकांश वर्षों में भारत के पक्ष में रहा। दूसरी तरफ धन की निकासी का स्वरूप भी एक प्रकार अप्रतिफलित निर्यात ही था।
A. ब्रिटिश काल में कुछ वर्षों को छोड़कर सामान्यत: भारत का व्यापार संतुलन अनुकूल था। चूँकि औद्योगिक क्रांति के कारण ब्रिटेन को अपने उद्योग के लिए कच्चे माल की आवश्यकता थी और भारत उस काल में ब्रिटेन को कच्चे माल का प्रमुख निर्यातक देश था। अत: व्यापार संतुलन अधिकांश वर्षों में भारत के पक्ष में रहा। दूसरी तरफ धन की निकासी का स्वरूप भी एक प्रकार अप्रतिफलित निर्यात ही था।