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Q: What is effect of liquefaction of sand? रेत के द्रवीकरण का प्रभाव क्या है?
  • A. Loss of shear strength of sand due to ground oscillation/जमीन के दोलन के कारण रेत के अपरूपण सामर्थ्य की हानि
  • B. Decrease in volume of sand/रेत के आयतन में कमी
  • C. Increase in pore pressure in sand/रेत के रन्ध्र दाब में वृद्धि
  • D. All of above/उपरोक्त सभी
Correct Answer: Option D - महीन और मध्यम रेत के एकसमान कण का आकार, संतृप्त मृदा, द्रवीकरण के लिए बहुत संवेदनशील होती है। जब इस प्रकार की मृदा जमाव का रिक्तता अनुपात (e) क्रांतिक रिक्तता अनुपात (e₀) से अधिक होता है तब अपरूपण प्रतिबल लगाने पर आयतन मे कमी (Decrease in volume) और रंध्र दाब मे वृद्धि (increase in pore pressure)हो जाती है। द्रवीकरण घटना (Liquefaction phenomenon)– द्रवीकरण एक संतृप्त ससंजनहीन मृदा (Saturated cohesionless soil) की स्थिति है जब भूकंप के दौरान कंपन के कारण (Caused by vibration) इसकी अपरूपण सामथ्र्य (Shear strength) शून्य हो जाती है और मृदा तरल की तरह व्यवहार करने लगती है। अत: संक्षेप में कहा जा सकता है कि द्रवीकरण होने के लिए, निम्नलिखित सभी पाँच स्थितियाँ होना आवश्यक है– (i) मृदा ससंजनहीन हो (The soil is cohesionless) (ii) मृदा ढीली हो (The soil is loose) (iii) मृदा संतृप्त हो (The soil is saturated) (iv) मृदा की सीमित पारगम्यता के कारण अनअपवाहित अवस्था (Undrained condition) विकसित होती है। (v) आवश्यक तीव्रता तथा अवधि के लिए जमीन का कंपन हो (There is shaking of ground of the required intensity and duration) उदाहरण– SP, SW, SM and ML
D. महीन और मध्यम रेत के एकसमान कण का आकार, संतृप्त मृदा, द्रवीकरण के लिए बहुत संवेदनशील होती है। जब इस प्रकार की मृदा जमाव का रिक्तता अनुपात (e) क्रांतिक रिक्तता अनुपात (e₀) से अधिक होता है तब अपरूपण प्रतिबल लगाने पर आयतन मे कमी (Decrease in volume) और रंध्र दाब मे वृद्धि (increase in pore pressure)हो जाती है। द्रवीकरण घटना (Liquefaction phenomenon)– द्रवीकरण एक संतृप्त ससंजनहीन मृदा (Saturated cohesionless soil) की स्थिति है जब भूकंप के दौरान कंपन के कारण (Caused by vibration) इसकी अपरूपण सामथ्र्य (Shear strength) शून्य हो जाती है और मृदा तरल की तरह व्यवहार करने लगती है। अत: संक्षेप में कहा जा सकता है कि द्रवीकरण होने के लिए, निम्नलिखित सभी पाँच स्थितियाँ होना आवश्यक है– (i) मृदा ससंजनहीन हो (The soil is cohesionless) (ii) मृदा ढीली हो (The soil is loose) (iii) मृदा संतृप्त हो (The soil is saturated) (iv) मृदा की सीमित पारगम्यता के कारण अनअपवाहित अवस्था (Undrained condition) विकसित होती है। (v) आवश्यक तीव्रता तथा अवधि के लिए जमीन का कंपन हो (There is shaking of ground of the required intensity and duration) उदाहरण– SP, SW, SM and ML

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महीन और मध्यम रेत के एकसमान कण का आकार, संतृप्त मृदा, द्रवीकरण के लिए बहुत संवेदनशील होती है। जब इस प्रकार की मृदा जमाव का रिक्तता अनुपात (e) क्रांतिक रिक्तता अनुपात (e₀) से अधिक होता है तब अपरूपण प्रतिबल लगाने पर आयतन मे कमी (Decrease in volume) और रंध्र दाब मे वृद्धि (increase in pore pressure)हो जाती है। द्रवीकरण घटना (Liquefaction phenomenon)– द्रवीकरण एक संतृप्त ससंजनहीन मृदा (Saturated cohesionless soil) की स्थिति है जब भूकंप के दौरान कंपन के कारण (Caused by vibration) इसकी अपरूपण सामथ्र्य (Shear strength) शून्य हो जाती है और मृदा तरल की तरह व्यवहार करने लगती है। अत: संक्षेप में कहा जा सकता है कि द्रवीकरण होने के लिए, निम्नलिखित सभी पाँच स्थितियाँ होना आवश्यक है– (i) मृदा ससंजनहीन हो (The soil is cohesionless) (ii) मृदा ढीली हो (The soil is loose) (iii) मृदा संतृप्त हो (The soil is saturated) (iv) मृदा की सीमित पारगम्यता के कारण अनअपवाहित अवस्था (Undrained condition) विकसित होती है। (v) आवश्यक तीव्रता तथा अवधि के लिए जमीन का कंपन हो (There is shaking of ground of the required intensity and duration) उदाहरण– SP, SW, SM and ML