Correct Answer:
Option A - PIL का पूर्ण रूप है– Public Interest Litigation (पब्लिक इंटरेस्ट लिटिगेशन), ‘लोकहित वाद’ के अन्तर्गत जीवन की मूलभूत आवश्यकताओं, शोषण, पर्यावरण, बालश्रम, स्त्रियों का शोषण आदि विषय आते है। जिस पर न्यायालय को किसी भी व्यक्ति या संस्था द्वारा मात्र सूचना प्राप्त होने पर न्यायालय स्वयं उसकी जाँच कराकर या वस्तुस्थिति को देखकर जनहित में निर्णय देता है। इस प्रकार की याचिका ‘उच्च न्यायालय’ या ‘उच्चतम न्यायालय’ में ही दाखिल की जा सकती है। ध्यातव्य है कि भारत के पूर्व न्यायाधीश ‘पी. एन. भगवती’ और वी.आर. कृष्ण अय्यर को भारत में ‘जनहित याचिका’ (PIL) का जनक माना जाता है।
A. PIL का पूर्ण रूप है– Public Interest Litigation (पब्लिक इंटरेस्ट लिटिगेशन), ‘लोकहित वाद’ के अन्तर्गत जीवन की मूलभूत आवश्यकताओं, शोषण, पर्यावरण, बालश्रम, स्त्रियों का शोषण आदि विषय आते है। जिस पर न्यायालय को किसी भी व्यक्ति या संस्था द्वारा मात्र सूचना प्राप्त होने पर न्यायालय स्वयं उसकी जाँच कराकर या वस्तुस्थिति को देखकर जनहित में निर्णय देता है। इस प्रकार की याचिका ‘उच्च न्यायालय’ या ‘उच्चतम न्यायालय’ में ही दाखिल की जा सकती है। ध्यातव्य है कि भारत के पूर्व न्यायाधीश ‘पी. एन. भगवती’ और वी.आर. कृष्ण अय्यर को भारत में ‘जनहित याचिका’ (PIL) का जनक माना जाता है।