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Q: What are the challenges in educating children with disabilities in a regular classroom? विकलांग बच्चों को नियमित कक्षा में शिक्षित करने में क्या चुनौतियाँ आती हैं? I. Negative attitudes of teachers and community I. शिक्षकों और समुदाय की नकारात्मक अभिवृत्ति II. Non-disabled peers and their parents. II.गैर-विकलांग साथी और उनके माता-पिता
  • A. केवल II/Only II
  • B. I तथा II दोनों/Both I and II
  • C. ना ही I ना ही II/Neither I nor II
  • D. केवल I//Only I
Correct Answer: Option B - विकलांग बच्चों के बारे में उपयुक्त दोनों कथन (I) (II) सही है। बालक अपंग हो, अन्धे हों, आधे अंधे हो, पूरे बहरे हो या अपूर्ण बहरे हों अथवा वे मानसिक रूप से अपंग या विकलांग हों, ऐसे बालकों को विभिन्न प्रकार की समस्याओं का सामना करना पड़ता है। ऐसे बालकों का इन समस्याओं की ओर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता होती है।- 1. शारीरिक दोषों के परिणामस्वरूप बालकों को हर क्षेत्र में समायोजना सम्बन्धी कई प्रकार की समस्याओं का सामना करना पड़ता है। 2. ऐसे बालकों में संवेगात्मक परिपक्वता नहीं आती। 3. इन्हें शिक्षकों और समुदाय की नकारात्मक अभिवृत्ति के अनुरूप देखा जाता है। 4. इन्हें शारीरिक खेलकूद में न हिस्सा ले पाने का दुख होता है। 5. गैर-विकलांग साथी संगत एवं उनके माता-पिता इन्हें हीन भावना से देखते हैं। 6. कक्षा में अन्धे और अर्द्ध -अन्धे बच्चों को भी बैठने की समस्या का सामना करना पड़ता हैं। 7. पूर्ण या अपूर्ण बहरों को सुनने की समस्या का सामना करना पड़ता है। 8. मानसिक रूप से अपंग बालकों को समायोजन सम्बन्धी मुख्य समस्याओं का सामना करना पड़ता है। जैसे, परिवार में समायोजन, स्कूल में समायोजन की समस्या।
B. विकलांग बच्चों के बारे में उपयुक्त दोनों कथन (I) (II) सही है। बालक अपंग हो, अन्धे हों, आधे अंधे हो, पूरे बहरे हो या अपूर्ण बहरे हों अथवा वे मानसिक रूप से अपंग या विकलांग हों, ऐसे बालकों को विभिन्न प्रकार की समस्याओं का सामना करना पड़ता है। ऐसे बालकों का इन समस्याओं की ओर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता होती है।- 1. शारीरिक दोषों के परिणामस्वरूप बालकों को हर क्षेत्र में समायोजना सम्बन्धी कई प्रकार की समस्याओं का सामना करना पड़ता है। 2. ऐसे बालकों में संवेगात्मक परिपक्वता नहीं आती। 3. इन्हें शिक्षकों और समुदाय की नकारात्मक अभिवृत्ति के अनुरूप देखा जाता है। 4. इन्हें शारीरिक खेलकूद में न हिस्सा ले पाने का दुख होता है। 5. गैर-विकलांग साथी संगत एवं उनके माता-पिता इन्हें हीन भावना से देखते हैं। 6. कक्षा में अन्धे और अर्द्ध -अन्धे बच्चों को भी बैठने की समस्या का सामना करना पड़ता हैं। 7. पूर्ण या अपूर्ण बहरों को सुनने की समस्या का सामना करना पड़ता है। 8. मानसिक रूप से अपंग बालकों को समायोजन सम्बन्धी मुख्य समस्याओं का सामना करना पड़ता है। जैसे, परिवार में समायोजन, स्कूल में समायोजन की समस्या।

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विकलांग बच्चों के बारे में उपयुक्त दोनों कथन (I) (II) सही है। बालक अपंग हो, अन्धे हों, आधे अंधे हो, पूरे बहरे हो या अपूर्ण बहरे हों अथवा वे मानसिक रूप से अपंग या विकलांग हों, ऐसे बालकों को विभिन्न प्रकार की समस्याओं का सामना करना पड़ता है। ऐसे बालकों का इन समस्याओं की ओर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता होती है।- 1. शारीरिक दोषों के परिणामस्वरूप बालकों को हर क्षेत्र में समायोजना सम्बन्धी कई प्रकार की समस्याओं का सामना करना पड़ता है। 2. ऐसे बालकों में संवेगात्मक परिपक्वता नहीं आती। 3. इन्हें शिक्षकों और समुदाय की नकारात्मक अभिवृत्ति के अनुरूप देखा जाता है। 4. इन्हें शारीरिक खेलकूद में न हिस्सा ले पाने का दुख होता है। 5. गैर-विकलांग साथी संगत एवं उनके माता-पिता इन्हें हीन भावना से देखते हैं। 6. कक्षा में अन्धे और अर्द्ध -अन्धे बच्चों को भी बैठने की समस्या का सामना करना पड़ता हैं। 7. पूर्ण या अपूर्ण बहरों को सुनने की समस्या का सामना करना पड़ता है। 8. मानसिक रूप से अपंग बालकों को समायोजन सम्बन्धी मुख्य समस्याओं का सामना करना पड़ता है। जैसे, परिवार में समायोजन, स्कूल में समायोजन की समस्या।