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Q: व्याकरण में कर्म का मुख्य लक्षण क्या कहा गया है?
  • A. तथायुक्तं चानीप्सितम्
  • B. अकथितञ्च
  • C. कर्तुरीप्सिततमं कर्म
  • D. हृक्रोरन्यतरस्याम्
Correct Answer: Option C - व्याकरण में कर्म का मुख्य लक्षण ‘‘कर्तुरीप्सिततमं कर्म’’ कहा गया है। अर्थात् कर्ता को जो सर्वाधिक अभीष्ट होता है, उसे ही कर्म कहा जाता है। जैसे-‘‘हरि: पुस्तकं पठति’’ में हरि कर्ता को पुस्तक पढ़ना सर्वाधिक अभीष्ट है, अत: यहाँ ‘पुस्तक’ कर्म है।
C. व्याकरण में कर्म का मुख्य लक्षण ‘‘कर्तुरीप्सिततमं कर्म’’ कहा गया है। अर्थात् कर्ता को जो सर्वाधिक अभीष्ट होता है, उसे ही कर्म कहा जाता है। जैसे-‘‘हरि: पुस्तकं पठति’’ में हरि कर्ता को पुस्तक पढ़ना सर्वाधिक अभीष्ट है, अत: यहाँ ‘पुस्तक’ कर्म है।

Explanations:

व्याकरण में कर्म का मुख्य लक्षण ‘‘कर्तुरीप्सिततमं कर्म’’ कहा गया है। अर्थात् कर्ता को जो सर्वाधिक अभीष्ट होता है, उसे ही कर्म कहा जाता है। जैसे-‘‘हरि: पुस्तकं पठति’’ में हरि कर्ता को पुस्तक पढ़ना सर्वाधिक अभीष्ट है, अत: यहाँ ‘पुस्तक’ कर्म है।