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Q: ‘विवेकभ्रष्टानां भवति विनिपात: शतमुख:’ इतीयं सूक्तिर्विद्यते
  • A. किरातार्जुनीये
  • B. नीतिशतके
  • C. मेघदूते
  • D. कादम्बर्यां शुकनासोपदेशे
Correct Answer: Option B - : ‘विवेक भ्रष्टानां भवति विनिपात: शतमुख: ‘इतीयं सूक्ति: नीतिशतके विद्यते। विवेक भ्रष्ट लोगों का पतन सैकड़ों प्रकार से होता है। इस सूक्ति में विवेक भ्रष्ट लोगों की तुलना गङ्गा से की गयी है। जिस प्रकार गङ्गा स्वर्ग से शिव के मस्तक पर, मस्तक से हिमालय पर, हिमालय से पृथ्वी पर, पृथ्वी से समुद्र में गिरी अर्थात् कोई स्थायित्व नहीं प्राप्त की उसी प्रकार जिनका विवेक भ्रष्ट हो जाता है उनका पतन सैकड़ों प्रकार से होता है।
B. : ‘विवेक भ्रष्टानां भवति विनिपात: शतमुख: ‘इतीयं सूक्ति: नीतिशतके विद्यते। विवेक भ्रष्ट लोगों का पतन सैकड़ों प्रकार से होता है। इस सूक्ति में विवेक भ्रष्ट लोगों की तुलना गङ्गा से की गयी है। जिस प्रकार गङ्गा स्वर्ग से शिव के मस्तक पर, मस्तक से हिमालय पर, हिमालय से पृथ्वी पर, पृथ्वी से समुद्र में गिरी अर्थात् कोई स्थायित्व नहीं प्राप्त की उसी प्रकार जिनका विवेक भ्रष्ट हो जाता है उनका पतन सैकड़ों प्रकार से होता है।

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: ‘विवेक भ्रष्टानां भवति विनिपात: शतमुख: ‘इतीयं सूक्ति: नीतिशतके विद्यते। विवेक भ्रष्ट लोगों का पतन सैकड़ों प्रकार से होता है। इस सूक्ति में विवेक भ्रष्ट लोगों की तुलना गङ्गा से की गयी है। जिस प्रकार गङ्गा स्वर्ग से शिव के मस्तक पर, मस्तक से हिमालय पर, हिमालय से पृथ्वी पर, पृथ्वी से समुद्र में गिरी अर्थात् कोई स्थायित्व नहीं प्राप्त की उसी प्रकार जिनका विवेक भ्रष्ट हो जाता है उनका पतन सैकड़ों प्रकार से होता है।