Correct Answer:
Option A - वेदस्य अपौरुषेयत्वं ‘जैमिनीय’ स्वीकरोति। अर्थात् वेद को अपौरुषेयत्व ‘जैमिनि’ ने स्वीकार किया है। जैमिनि ने अपने मीमांसा दर्शन में वेद का लक्षण देते हुए कहा है कि – ‘अपौरुषेयं वाक्यं वेद:’।
A. वेदस्य अपौरुषेयत्वं ‘जैमिनीय’ स्वीकरोति। अर्थात् वेद को अपौरुषेयत्व ‘जैमिनि’ ने स्वीकार किया है। जैमिनि ने अपने मीमांसा दर्शन में वेद का लक्षण देते हुए कहा है कि – ‘अपौरुषेयं वाक्यं वेद:’।
Explanations:
वेदस्य अपौरुषेयत्वं ‘जैमिनीय’ स्वीकरोति। अर्थात् वेद को अपौरुषेयत्व ‘जैमिनि’ ने स्वीकार किया है। जैमिनि ने अपने मीमांसा दर्शन में वेद का लक्षण देते हुए कहा है कि – ‘अपौरुषेयं वाक्यं वेद:’।
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