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Q: वेदस्य अपौरुषेयत्वं क: स्वीकरोति?
  • A. जैमिनीय
  • B. वेबर:
  • C. विल्सन:
  • D. उपर्युक्तेषु एकस्मात् अधिकम्
  • E. उपर्युक्तेषु कश्चन अपि नास्ति
Correct Answer: Option A - वेदस्य अपौरुषेयत्वं ‘जैमिनीय’ स्वीकरोति। अर्थात् वेद को अपौरुषेयत्व ‘जैमिनि’ ने स्वीकार किया है। जैमिनि ने अपने मीमांसा दर्शन में वेद का लक्षण देते हुए कहा है कि – ‘अपौरुषेयं वाक्यं वेद:’।
A. वेदस्य अपौरुषेयत्वं ‘जैमिनीय’ स्वीकरोति। अर्थात् वेद को अपौरुषेयत्व ‘जैमिनि’ ने स्वीकार किया है। जैमिनि ने अपने मीमांसा दर्शन में वेद का लक्षण देते हुए कहा है कि – ‘अपौरुषेयं वाक्यं वेद:’।

Explanations:

वेदस्य अपौरुषेयत्वं ‘जैमिनीय’ स्वीकरोति। अर्थात् वेद को अपौरुषेयत्व ‘जैमिनि’ ने स्वीकार किया है। जैमिनि ने अपने मीमांसा दर्शन में वेद का लक्षण देते हुए कहा है कि – ‘अपौरुषेयं वाक्यं वेद:’।