Correct Answer:
Option C - A और B दोनों सही है और B का कारण है A। उत्तरवैदिक काल में समाज चार वर्णों में वर्गीकृत था - ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य और शूद्र। यह विभाजन पदानुक्रम तथा भेदभाव पर आधारित था। वर्ण की उत्पत्ति संस्कृत के वृ धातु से हुई है जिसका अर्थ है वरण करना या चुनना। कई लोगों ने ब्राह्मणों द्वारा बनायी गयी सवर्ण व्यवस्था को स्वीकार नहीं किया, इन महान विभूतियों में राजा राममोहन राय, डॉ. भीमराव अम्बेडकर, ज्योतिवा पुâले, पण्डिता रमाबाई इत्यादि हैं।
C. A और B दोनों सही है और B का कारण है A। उत्तरवैदिक काल में समाज चार वर्णों में वर्गीकृत था - ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य और शूद्र। यह विभाजन पदानुक्रम तथा भेदभाव पर आधारित था। वर्ण की उत्पत्ति संस्कृत के वृ धातु से हुई है जिसका अर्थ है वरण करना या चुनना। कई लोगों ने ब्राह्मणों द्वारा बनायी गयी सवर्ण व्यवस्था को स्वीकार नहीं किया, इन महान विभूतियों में राजा राममोहन राय, डॉ. भीमराव अम्बेडकर, ज्योतिवा पुâले, पण्डिता रमाबाई इत्यादि हैं।