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Q: ‘वरं विरोधोऽपि समं महात्मभि:’ इतीयं सूक्ति: कस्मात् उद्धृता?
  • A. किरातार्जुनीयात्
  • B. शिशुपालवधात्
  • C. मेघदूतात्
  • D. अभिज्ञानशाकुन्तलात्
Correct Answer: Option A - ‘वरं विरोधोऽपि समं महात्मभि:’ यह उक्ति किरातार्जुनीयम् के प्रथम सर्ग की है। इसमें वनेचर महाराज युधिष्ठिर से दुर्योधन के प्रजाविषयक वृतान्त को बताते हुए कहता है कि महात्माओं के साथ किया गया विरोध भी दुष्टों के संग से अच्छा होता है।
A. ‘वरं विरोधोऽपि समं महात्मभि:’ यह उक्ति किरातार्जुनीयम् के प्रथम सर्ग की है। इसमें वनेचर महाराज युधिष्ठिर से दुर्योधन के प्रजाविषयक वृतान्त को बताते हुए कहता है कि महात्माओं के साथ किया गया विरोध भी दुष्टों के संग से अच्छा होता है।

Explanations:

‘वरं विरोधोऽपि समं महात्मभि:’ यह उक्ति किरातार्जुनीयम् के प्रथम सर्ग की है। इसमें वनेचर महाराज युधिष्ठिर से दुर्योधन के प्रजाविषयक वृतान्त को बताते हुए कहता है कि महात्माओं के साथ किया गया विरोध भी दुष्टों के संग से अच्छा होता है।