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Q: ‘‘वरं विरोधोऽपि समं महात्मभि:’’ - इति सूाक्ति: कस्मात् ग्रन्थात् उद्धृता अस्ति ?
  • A. नैषधीयचरितम्
  • B. किरातार्जुनीयम्
  • C. शिशुपालवधम्
  • D. उपर्युक्तेषु एकस्मात् अधिकम्
  • E. उपर्युक्तेषु कश्चन अपि नास्ति
Correct Answer: Option B - ‘‘वरं विरोधोऽपि समं महात्मभि:’’ इति सूाक्ति : किरातार्जुनीयम् ग्रन्थात् उद्धृता अस्ति । यह सूाक्ति किरातार्जुनीयम् महाकाव्य के प्रथम सर्ग से उद्धृत है। यह महाकाव्य बृहत्त्रयी का प्रथम ग्रन्थ है यह 18 सर्गों में निबद्ध है। यहाँ अर्जुन के पशुपति अस्त्र प्राप्ति का वर्णन है। इन्द्र कील पर्वत का भी उल्लेख है। प्रवक्तुमिच्छन्ति मृषा हितैषिण:।। अहो दुरन्ता बलवद् विरोधिता।। पराभवोप्युत्सव एव मानिनाम्।
B. ‘‘वरं विरोधोऽपि समं महात्मभि:’’ इति सूाक्ति : किरातार्जुनीयम् ग्रन्थात् उद्धृता अस्ति । यह सूाक्ति किरातार्जुनीयम् महाकाव्य के प्रथम सर्ग से उद्धृत है। यह महाकाव्य बृहत्त्रयी का प्रथम ग्रन्थ है यह 18 सर्गों में निबद्ध है। यहाँ अर्जुन के पशुपति अस्त्र प्राप्ति का वर्णन है। इन्द्र कील पर्वत का भी उल्लेख है। प्रवक्तुमिच्छन्ति मृषा हितैषिण:।। अहो दुरन्ता बलवद् विरोधिता।। पराभवोप्युत्सव एव मानिनाम्।

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‘‘वरं विरोधोऽपि समं महात्मभि:’’ इति सूाक्ति : किरातार्जुनीयम् ग्रन्थात् उद्धृता अस्ति । यह सूाक्ति किरातार्जुनीयम् महाकाव्य के प्रथम सर्ग से उद्धृत है। यह महाकाव्य बृहत्त्रयी का प्रथम ग्रन्थ है यह 18 सर्गों में निबद्ध है। यहाँ अर्जुन के पशुपति अस्त्र प्राप्ति का वर्णन है। इन्द्र कील पर्वत का भी उल्लेख है। प्रवक्तुमिच्छन्ति मृषा हितैषिण:।। अहो दुरन्ता बलवद् विरोधिता।। पराभवोप्युत्सव एव मानिनाम्।