Correct Answer:
Option A - ‘वन्दे वाणी विनायकौ’ रामवृक्ष बेनीपुरी का निबंध-संग्रह है। विवेकीराय के निबन्ध हैं– किसानों का देश, त्रिधारा, जुलूस रुका है, आम रास्ता नहीं है। कन्हैयालाल मिश्र ‘प्रभाकर’ का नयी पीढ़ी नये विचार, जिंदगी मुस्कराई, माटी हो गई सोना और कुबेरनाथ राय का प्रिया नीलकण्ठी, रस आखेटक, गंधमादन, विषाद योग, निषाद बाँसुरी आदि निबंध हैं।
A. ‘वन्दे वाणी विनायकौ’ रामवृक्ष बेनीपुरी का निबंध-संग्रह है। विवेकीराय के निबन्ध हैं– किसानों का देश, त्रिधारा, जुलूस रुका है, आम रास्ता नहीं है। कन्हैयालाल मिश्र ‘प्रभाकर’ का नयी पीढ़ी नये विचार, जिंदगी मुस्कराई, माटी हो गई सोना और कुबेरनाथ राय का प्रिया नीलकण्ठी, रस आखेटक, गंधमादन, विषाद योग, निषाद बाँसुरी आदि निबंध हैं।