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Q: विकास की प्रक्रिया की क्या विशेषताएँ हैं? (i) यह प्रक्रिया बचपन तक सीमित है। (ii) यह जीवन भर चलने वाली प्रक्रिया है। (iii) इसकी शुरूआत जन्म के समय होती है। ( iv) इसकी शुरूआत गर्भधारण के समय होती है। सही विकल्प चुनें–
  • A. (i), (iii)
  • B. (i), (iv)
  • C. (ii), (iii)
  • D. (ii), (iv)
Correct Answer: Option D - प्रत्येक व्यक्ति में शारीरिक, मानसिक, भावनात्मक और सामाजिक परिपेक्ष्य में समय-समय पर बदलाव आता है। जन्म के समय वह शिशु कहलाता है, कुछ समय के बाद बालक, फिर किशोर, वयस्क, और अंत में प्रौढ़ एवं वृद्ध कहलाता है। बालक की आयु के साथ शारीरिक, मानसिक, सामाजिक, सांवेगिक, नैतिक आदि पक्षों का विकास होता है। व्यक्ति के सम्पूर्ण व्यक्तित्व में परिवर्तन को अभिवृद्धि एवं विकास के नाम से जाना जाता है। हरलॉक के अनुसार, ‘‘विकास अभिवृद्धि तक सीमित नहीं है, अपितु इसमें परिवर्तनों का वह प्रगतिशील क्रम निहित है जो परिपक्वता के लक्ष्य की ओर अग्रसर होता है। विकास के परिणामस्वरूप व्यक्ति में नवीन विशेषताएँ और नवीन योग्यताएँ प्रकट होती है।’’ इसकी निम्नलिखित विशेषताएँ होती हैं– यह जीवन भर चलने वाली प्रक्रिया है। इसकी शुरूआत गर्भधारण के समय से ही होती है। वृद्धि की तुलना में विकास अधिक व्यापक है। इसमें शारीरिक विकास के साथ-साथ मानसिक विकास भी होता है।
D. प्रत्येक व्यक्ति में शारीरिक, मानसिक, भावनात्मक और सामाजिक परिपेक्ष्य में समय-समय पर बदलाव आता है। जन्म के समय वह शिशु कहलाता है, कुछ समय के बाद बालक, फिर किशोर, वयस्क, और अंत में प्रौढ़ एवं वृद्ध कहलाता है। बालक की आयु के साथ शारीरिक, मानसिक, सामाजिक, सांवेगिक, नैतिक आदि पक्षों का विकास होता है। व्यक्ति के सम्पूर्ण व्यक्तित्व में परिवर्तन को अभिवृद्धि एवं विकास के नाम से जाना जाता है। हरलॉक के अनुसार, ‘‘विकास अभिवृद्धि तक सीमित नहीं है, अपितु इसमें परिवर्तनों का वह प्रगतिशील क्रम निहित है जो परिपक्वता के लक्ष्य की ओर अग्रसर होता है। विकास के परिणामस्वरूप व्यक्ति में नवीन विशेषताएँ और नवीन योग्यताएँ प्रकट होती है।’’ इसकी निम्नलिखित विशेषताएँ होती हैं– यह जीवन भर चलने वाली प्रक्रिया है। इसकी शुरूआत गर्भधारण के समय से ही होती है। वृद्धि की तुलना में विकास अधिक व्यापक है। इसमें शारीरिक विकास के साथ-साथ मानसिक विकास भी होता है।

Explanations:

प्रत्येक व्यक्ति में शारीरिक, मानसिक, भावनात्मक और सामाजिक परिपेक्ष्य में समय-समय पर बदलाव आता है। जन्म के समय वह शिशु कहलाता है, कुछ समय के बाद बालक, फिर किशोर, वयस्क, और अंत में प्रौढ़ एवं वृद्ध कहलाता है। बालक की आयु के साथ शारीरिक, मानसिक, सामाजिक, सांवेगिक, नैतिक आदि पक्षों का विकास होता है। व्यक्ति के सम्पूर्ण व्यक्तित्व में परिवर्तन को अभिवृद्धि एवं विकास के नाम से जाना जाता है। हरलॉक के अनुसार, ‘‘विकास अभिवृद्धि तक सीमित नहीं है, अपितु इसमें परिवर्तनों का वह प्रगतिशील क्रम निहित है जो परिपक्वता के लक्ष्य की ओर अग्रसर होता है। विकास के परिणामस्वरूप व्यक्ति में नवीन विशेषताएँ और नवीन योग्यताएँ प्रकट होती है।’’ इसकी निम्नलिखित विशेषताएँ होती हैं– यह जीवन भर चलने वाली प्रक्रिया है। इसकी शुरूआत गर्भधारण के समय से ही होती है। वृद्धि की तुलना में विकास अधिक व्यापक है। इसमें शारीरिक विकास के साथ-साथ मानसिक विकास भी होता है।