Correct Answer:
Option C - विकास की किशोरावस्था में निम्न लक्षण समाहित हैं-
(1) स्वतन्त्रता की स्थापना
(2) अस्मिता का विकास
(3) अमूर्त चिंतन
किशोरावस्था को तनाव, तूफान तथा संघर्ष का काल भी कहा जाता है। यह वह अवस्था होती है, जिसमें बालक पूर्ण रूप से परिपक्व हो जाता है और वह सभी प्रकार के मूर्त व अमूर्त चिंतन करने लगते हैं। किशोरावस्था में शारीरिक और मानसिक स्वतन्त्रता की प्रबल भावना होती है। वह बड़ों के आदेशों, विभिन्न परम्पराओं, रीति-रिवाजों और अंधविश्वासों के बन्धनों में न बँधकर स्वतन्त्र जीवन व्यतीत करना चाहता है। अस्मिता/पहचान विकास का तात्पर्य है हम खुद को वैâसे परिभाषित करे। जिसे लोग हमें जान सके। पहचान हमारे आत्म-सम्मान को बढ़ावा देती है। हमारी आत्म-पहचान हमारे अपनेपन की धारणाओं को आकार देती है। जबकि अमूर्त चिंतन ज्ञान पर आधारित चिंतन होता है। अमूर्त चिंतन के लिए किसी वस्तु का प्रत्यक्ष रूप से सामने होना जरूरी नहीं है। इस प्रकार के चिंतन के लिए बालक अपनी बुद्धि व कल्पना शक्ति का उपयोग करता है। किशोरावस्था में बालक के सामने कोई वस्तु या समस्या न हो फिर भी वह सोचता है तो वह अमूर्त चिंतन है।
C. विकास की किशोरावस्था में निम्न लक्षण समाहित हैं-
(1) स्वतन्त्रता की स्थापना
(2) अस्मिता का विकास
(3) अमूर्त चिंतन
किशोरावस्था को तनाव, तूफान तथा संघर्ष का काल भी कहा जाता है। यह वह अवस्था होती है, जिसमें बालक पूर्ण रूप से परिपक्व हो जाता है और वह सभी प्रकार के मूर्त व अमूर्त चिंतन करने लगते हैं। किशोरावस्था में शारीरिक और मानसिक स्वतन्त्रता की प्रबल भावना होती है। वह बड़ों के आदेशों, विभिन्न परम्पराओं, रीति-रिवाजों और अंधविश्वासों के बन्धनों में न बँधकर स्वतन्त्र जीवन व्यतीत करना चाहता है। अस्मिता/पहचान विकास का तात्पर्य है हम खुद को वैâसे परिभाषित करे। जिसे लोग हमें जान सके। पहचान हमारे आत्म-सम्मान को बढ़ावा देती है। हमारी आत्म-पहचान हमारे अपनेपन की धारणाओं को आकार देती है। जबकि अमूर्त चिंतन ज्ञान पर आधारित चिंतन होता है। अमूर्त चिंतन के लिए किसी वस्तु का प्रत्यक्ष रूप से सामने होना जरूरी नहीं है। इस प्रकार के चिंतन के लिए बालक अपनी बुद्धि व कल्पना शक्ति का उपयोग करता है। किशोरावस्था में बालक के सामने कोई वस्तु या समस्या न हो फिर भी वह सोचता है तो वह अमूर्त चिंतन है।