Correct Answer:
Option D - ‘वह उस शाखा का वन-विहंग
उड़ गया मुक्त नभ निरस्तरंग’
उक्त काव्यपंक्ति छायावादी कवि सूर्यकान्त त्रिपाठी ‘निराला’ की है। यह पंक्ति निराला कृत ‘तुलसीदास’ से अवतरित है। निराला के अन्य काव्य संग्रह हैं- अनामिका (1923 ई.), परिमल (1930 ई.), गीतिका (1936 ई.), कुकुरमुत्ता (1942 ई.), अणिमा (1943 ई), बेला (1946 ई.), नये पत्ते (1946 ई.), अर्चना (1950 ई.), आराधना (1953 ई.), गीतगुंज (1954 ई.), सांध्यकाकली (1969ई.)।
निम्नलिखित पंक्तियाँ एवं उनके रचनाकार-
तेरे प्रकाश में चेतन संसार वेदना वाला।
मेरे समीप होता है पाकर कुछ करूण उजाला।
- जयशंकर प्रसार
सुन्दर है विहग, सुमन सुन्दर
मानव तुम सबसे सुन्दरतम्।
- सुमित्रानन्दन पन्त
क्या पूजा क्या अर्चन रे?
उस असीम का सुन्दर मन्दिर मेरा लघुतम जीवन रे।
- महादेवी वर्मा
D. ‘वह उस शाखा का वन-विहंग
उड़ गया मुक्त नभ निरस्तरंग’
उक्त काव्यपंक्ति छायावादी कवि सूर्यकान्त त्रिपाठी ‘निराला’ की है। यह पंक्ति निराला कृत ‘तुलसीदास’ से अवतरित है। निराला के अन्य काव्य संग्रह हैं- अनामिका (1923 ई.), परिमल (1930 ई.), गीतिका (1936 ई.), कुकुरमुत्ता (1942 ई.), अणिमा (1943 ई), बेला (1946 ई.), नये पत्ते (1946 ई.), अर्चना (1950 ई.), आराधना (1953 ई.), गीतगुंज (1954 ई.), सांध्यकाकली (1969ई.)।
निम्नलिखित पंक्तियाँ एवं उनके रचनाकार-
तेरे प्रकाश में चेतन संसार वेदना वाला।
मेरे समीप होता है पाकर कुछ करूण उजाला।
- जयशंकर प्रसार
सुन्दर है विहग, सुमन सुन्दर
मानव तुम सबसे सुन्दरतम्।
- सुमित्रानन्दन पन्त
क्या पूजा क्या अर्चन रे?
उस असीम का सुन्दर मन्दिर मेरा लघुतम जीवन रे।
- महादेवी वर्मा