Correct Answer:
Option B - ‘वाचस्पति’ अलुक् तत्पुरुष है। इस समास में पूर्व पद की विभक्ति का लोप नहीं होता है; जैसे- युधिष्ठिर, आत्मनेपदम् अन्तेवासी, परस्मैपदम्। जिस शब्द के पूर्वपद में निषेधार्थक ‘अ’ या ‘अन्’ शब्द का प्रयोग होता है। उसे नञ् तत्पुरुष समास कहा जाता है; जैसे- अनश्व, अगति, अनागत, अनुचित।
संबन्ध तत्पुरुष- राजपुरुष, देवपूजक, रामानुज आदि।
बहुव्रीहि समास- जहाँ अन्य पद का अर्थ प्रधान हो बहुव्रीहि समास होता है; जैसे- पीताम्बर, लम्बोदर, चन्द्रमौलि, चक्रपाणि।
B. ‘वाचस्पति’ अलुक् तत्पुरुष है। इस समास में पूर्व पद की विभक्ति का लोप नहीं होता है; जैसे- युधिष्ठिर, आत्मनेपदम् अन्तेवासी, परस्मैपदम्। जिस शब्द के पूर्वपद में निषेधार्थक ‘अ’ या ‘अन्’ शब्द का प्रयोग होता है। उसे नञ् तत्पुरुष समास कहा जाता है; जैसे- अनश्व, अगति, अनागत, अनुचित।
संबन्ध तत्पुरुष- राजपुरुष, देवपूजक, रामानुज आदि।
बहुव्रीहि समास- जहाँ अन्य पद का अर्थ प्रधान हो बहुव्रीहि समास होता है; जैसे- पीताम्बर, लम्बोदर, चन्द्रमौलि, चक्रपाणि।