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Q: ‘वाचस्पति’ किस समास का समस्तपद है?
  • A. न तत्पुरुष
  • B. अलुक् तत्पुरुष
  • C. संबंध तत्पुरुष
  • D. बहुब्रीहि
Correct Answer: Option B - ‘वाचस्पति’ अलुक् तत्पुरुष है। इस समास में पूर्व पद की विभक्ति का लोप नहीं होता है; जैसे- युधिष्ठिर, आत्मनेपदम् अन्तेवासी, परस्मैपदम्। जिस शब्द के पूर्वपद में निषेधार्थक ‘अ’ या ‘अन्’ शब्द का प्रयोग होता है। उसे नञ् तत्पुरुष समास कहा जाता है; जैसे- अनश्व, अगति, अनागत, अनुचित। संबन्ध तत्पुरुष- राजपुरुष, देवपूजक, रामानुज आदि। बहुव्रीहि समास- जहाँ अन्य पद का अर्थ प्रधान हो बहुव्रीहि समास होता है; जैसे- पीताम्बर, लम्बोदर, चन्द्रमौलि, चक्रपाणि।
B. ‘वाचस्पति’ अलुक् तत्पुरुष है। इस समास में पूर्व पद की विभक्ति का लोप नहीं होता है; जैसे- युधिष्ठिर, आत्मनेपदम् अन्तेवासी, परस्मैपदम्। जिस शब्द के पूर्वपद में निषेधार्थक ‘अ’ या ‘अन्’ शब्द का प्रयोग होता है। उसे नञ् तत्पुरुष समास कहा जाता है; जैसे- अनश्व, अगति, अनागत, अनुचित। संबन्ध तत्पुरुष- राजपुरुष, देवपूजक, रामानुज आदि। बहुव्रीहि समास- जहाँ अन्य पद का अर्थ प्रधान हो बहुव्रीहि समास होता है; जैसे- पीताम्बर, लम्बोदर, चन्द्रमौलि, चक्रपाणि।

Explanations:

‘वाचस्पति’ अलुक् तत्पुरुष है। इस समास में पूर्व पद की विभक्ति का लोप नहीं होता है; जैसे- युधिष्ठिर, आत्मनेपदम् अन्तेवासी, परस्मैपदम्। जिस शब्द के पूर्वपद में निषेधार्थक ‘अ’ या ‘अन्’ शब्द का प्रयोग होता है। उसे नञ् तत्पुरुष समास कहा जाता है; जैसे- अनश्व, अगति, अनागत, अनुचित। संबन्ध तत्पुरुष- राजपुरुष, देवपूजक, रामानुज आदि। बहुव्रीहि समास- जहाँ अन्य पद का अर्थ प्रधान हो बहुव्रीहि समास होता है; जैसे- पीताम्बर, लम्बोदर, चन्द्रमौलि, चक्रपाणि।