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Q: `विभावानुभावव्यभिचारिसंयोगाद्रसनिष्पति:' को प्रतिपादित किया है –
  • A. दण्डी ने
  • B. भरतमुनि ने
  • C. वामन ने
  • D. अभिनवगुप्त ने
Correct Answer: Option B - रस सम्प्रदाय के मूल प्रवर्तक तथा `नाट्यशास्त्र' नामक ग्रंथ के प्रणेता आचार्य भरतमुनि ने अपने नाट्यशास्त्र ग्रंथ में निम्नलिखित रससूत्र दिया है -`विभावानुभावव्यभिचारिसंयोगाद्रस निष्पत्ति:' अर्थात् विभाव, अनुभाव, व्यभिचारी भाव के संयोग से रस की निष्पत्ति होती है।
B. रस सम्प्रदाय के मूल प्रवर्तक तथा `नाट्यशास्त्र' नामक ग्रंथ के प्रणेता आचार्य भरतमुनि ने अपने नाट्यशास्त्र ग्रंथ में निम्नलिखित रससूत्र दिया है -`विभावानुभावव्यभिचारिसंयोगाद्रस निष्पत्ति:' अर्थात् विभाव, अनुभाव, व्यभिचारी भाव के संयोग से रस की निष्पत्ति होती है।

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रस सम्प्रदाय के मूल प्रवर्तक तथा `नाट्यशास्त्र' नामक ग्रंथ के प्रणेता आचार्य भरतमुनि ने अपने नाट्यशास्त्र ग्रंथ में निम्नलिखित रससूत्र दिया है -`विभावानुभावव्यभिचारिसंयोगाद्रस निष्पत्ति:' अर्थात् विभाव, अनुभाव, व्यभिचारी भाव के संयोग से रस की निष्पत्ति होती है।