Correct Answer:
Option C - ‘उत्तिष्ठत जाग्रत प्राप्य वरान्निबोधत’ यह मन्त्र कठोपनिषद् में है। यजुर्वेद की दो शाखाओं में (1) शुक्ल यजुर्वेद एवं (2) कृष्णयजुर्वेद। कठोपनिषद् कृष्णयजुर्वेद के कठ संहिता से सम्बन्धित है। इसमें बताया गया है कि उठो, जागो और वर प्राप्त करो।
C. ‘उत्तिष्ठत जाग्रत प्राप्य वरान्निबोधत’ यह मन्त्र कठोपनिषद् में है। यजुर्वेद की दो शाखाओं में (1) शुक्ल यजुर्वेद एवं (2) कृष्णयजुर्वेद। कठोपनिषद् कृष्णयजुर्वेद के कठ संहिता से सम्बन्धित है। इसमें बताया गया है कि उठो, जागो और वर प्राप्त करो।