Correct Answer:
Option A - उत्तररामचरितम् नाटक के तृतीय अङ्क में प्रधान रस करुण है। इस अङ्क में छायादृश्य भवभूति की मौलिक कल्पना है। इसमें सीता अदृश्य रहते हुए राम की दयनीय स्थित को देखती है और मूर्छित राम को हस्तस्पर्श से होश में लाती है।
A. उत्तररामचरितम् नाटक के तृतीय अङ्क में प्रधान रस करुण है। इस अङ्क में छायादृश्य भवभूति की मौलिक कल्पना है। इसमें सीता अदृश्य रहते हुए राम की दयनीय स्थित को देखती है और मूर्छित राम को हस्तस्पर्श से होश में लाती है।