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Q: उत्तरांचल में जड़ी-बूटियों की प्राप्त होने वाली किस्में लगभग हैं
  • A. 100
  • B. 500
  • C. 1000
  • D. 1800
Correct Answer: Option B - उत्तरांचल की सर्वाधिक प्रमुख विशेषता वानस्पतिक विविधता है। आयुर्वेद ग्रन्थ चरक संहिता, रामायण व आदि ग्रन्थों में इस क्षेत्र में पाई जाने वाली जड़ी-बूटियों का विस्तृत वर्णन मिलता है। उत्तरांचल में लगभग 500 प्रकार की जड़ी-बूटियां पाई जाती है, जिनकी कीमत लगभग 500 करोड़ रुपये आंकी गयी है। जैसे बुरांश के फूल को पीस कर पेचिस में इस्तेमाल किया जाता है। इसी प्रकार किल्मोड़ा को पीलिया में, घोडवच को अतिसार में, मरोड़फली को सर्वविष व चिरौता को ज्वर में प्रयोग करते हैं।
B. उत्तरांचल की सर्वाधिक प्रमुख विशेषता वानस्पतिक विविधता है। आयुर्वेद ग्रन्थ चरक संहिता, रामायण व आदि ग्रन्थों में इस क्षेत्र में पाई जाने वाली जड़ी-बूटियों का विस्तृत वर्णन मिलता है। उत्तरांचल में लगभग 500 प्रकार की जड़ी-बूटियां पाई जाती है, जिनकी कीमत लगभग 500 करोड़ रुपये आंकी गयी है। जैसे बुरांश के फूल को पीस कर पेचिस में इस्तेमाल किया जाता है। इसी प्रकार किल्मोड़ा को पीलिया में, घोडवच को अतिसार में, मरोड़फली को सर्वविष व चिरौता को ज्वर में प्रयोग करते हैं।

Explanations:

उत्तरांचल की सर्वाधिक प्रमुख विशेषता वानस्पतिक विविधता है। आयुर्वेद ग्रन्थ चरक संहिता, रामायण व आदि ग्रन्थों में इस क्षेत्र में पाई जाने वाली जड़ी-बूटियों का विस्तृत वर्णन मिलता है। उत्तरांचल में लगभग 500 प्रकार की जड़ी-बूटियां पाई जाती है, जिनकी कीमत लगभग 500 करोड़ रुपये आंकी गयी है। जैसे बुरांश के फूल को पीस कर पेचिस में इस्तेमाल किया जाता है। इसी प्रकार किल्मोड़ा को पीलिया में, घोडवच को अतिसार में, मरोड़फली को सर्वविष व चिरौता को ज्वर में प्रयोग करते हैं।