Correct Answer:
Option A - • के. जी. सुब्रमण्यम अपने में चित्रण धरातल के रूप में कैनवास के स्थान पर एक्रेलिक शीट और प्लास्टिक शीटों का प्रयोग अधिक किया। एक्रेलिक कागज पर जलवर्ण, ग्वाश और तैल वर्ण का उपयोग किया। प्लास्टिक शीटों पर जल एवं तैल दोनों रंगों का अद्वितीय मिश्रण है।
• के. जी. सुब्रमण्यम ब्राक और मातिस से प्रभावित थे, मातिस का प्रभाव अधिक था।
• के.जी. ने 1971 ई. में बहादुरी के तमगों से लदे जनरलों के चेहरों का निर्माण किया। नीचे एक तमगा पर तैल रंगों में गुजरात की हिंसा पर तीखा प्रहार किया। गुजरात-2003 शीर्षक कविता को आर्ट हैरिटेज की प्रदर्शनी के कैटलाग में छापा गया।
• के.जी. सुब्रमण्यम ने धरातल पर विविध प्रभाव उत्पन्न करने हेतु रेत, बालू, संगमरमर का चूर्ण आदि का प्रयोग चमक उत्पन्न करने के लिये किया।
• वर्ष 2002 में के. जी. ने एनैमल ऑन आइरन शीट माध्यम में कमरे के भीतर बैठी आकृतियों को बहुत सुन्दर अभिव्यक्ति प्रदान की है।
A. • के. जी. सुब्रमण्यम अपने में चित्रण धरातल के रूप में कैनवास के स्थान पर एक्रेलिक शीट और प्लास्टिक शीटों का प्रयोग अधिक किया। एक्रेलिक कागज पर जलवर्ण, ग्वाश और तैल वर्ण का उपयोग किया। प्लास्टिक शीटों पर जल एवं तैल दोनों रंगों का अद्वितीय मिश्रण है।
• के. जी. सुब्रमण्यम ब्राक और मातिस से प्रभावित थे, मातिस का प्रभाव अधिक था।
• के.जी. ने 1971 ई. में बहादुरी के तमगों से लदे जनरलों के चेहरों का निर्माण किया। नीचे एक तमगा पर तैल रंगों में गुजरात की हिंसा पर तीखा प्रहार किया। गुजरात-2003 शीर्षक कविता को आर्ट हैरिटेज की प्रदर्शनी के कैटलाग में छापा गया।
• के.जी. सुब्रमण्यम ने धरातल पर विविध प्रभाव उत्पन्न करने हेतु रेत, बालू, संगमरमर का चूर्ण आदि का प्रयोग चमक उत्पन्न करने के लिये किया।
• वर्ष 2002 में के. जी. ने एनैमल ऑन आइरन शीट माध्यम में कमरे के भीतर बैठी आकृतियों को बहुत सुन्दर अभिव्यक्ति प्रदान की है।