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Q: Under whose chairmanship a committee was formed to defend the accused in Kakori Case? काकोरी केस के अभियुक्तों के बचाव हेतु किसकी अध्यक्षता में एक समिति का गठन हुआ था?
  • A. Acharya Narendra Dev/आचार्य नरेन्द्र देव
  • B. Govind Ballabh Pant/गोबिन्द बल्लभ पंत
  • C. Chandrabhanu Gupta/चन्द्रभानु गुप्त
  • D. Motilal Nehru/मोतीलाल नेहरू
Correct Answer: Option B - 9 अगस्त, 1925 को उत्तर रेलवे के लखनऊ सहारनपुर संभाग के काकोरी नामक स्थान पर ‘8 डाउन ट्रेन’ पर डकैती डालकर हिन्दुस्तान रिपब्लिकन एसोसिएशन नामक संगठन के क्रांतिकारियों द्वारा खजाने को लूट लिया गया। सरकार ने षड्यंत्र में शामिल 29 क्रांतिकारियों को पकड़ लिया। चंद्रशेखर आजाद को पुलिस पकडनें में असफल रहीं। काकोरी केस के अभियुक्तों के बचाव के लिए गोविन्द वल्लभ पंत की अध्यक्षता में कांग्रेस ने बचाव समिति का गठन किया था। जिसके अन्य सदस्य चन्द्रभानुगुप्त, मोहन लाल सक्सेना, अजीत प्रसाद जैन और कृपाशंकर हेजला प्रमुख थे। इस मुकदमें में सरकारी वकील जगत नारायण मुल्ला थे। काकोरी षड्यंत्र केस में राम प्रसाद बिस्मिल, असफाक उल्ला खाँ, रोशन सिंह, राजेन्द्र लाहिड़ी को मुकदमा चलाकर फाँसी दे दी गयी। काकोरी काण्ड के आरोपी चन्द्रशेखर आजाद को फाँसी नहीं दी गयी थी, क्योंकि उन्हें पुलिस कभी गिरफ्तार नहीं कर पायी थी। वर्तमान में काकोरी काण्ड का नाम ‘काकोरी ट्रेन एक्शन’ कर दिया गया है।
B. 9 अगस्त, 1925 को उत्तर रेलवे के लखनऊ सहारनपुर संभाग के काकोरी नामक स्थान पर ‘8 डाउन ट्रेन’ पर डकैती डालकर हिन्दुस्तान रिपब्लिकन एसोसिएशन नामक संगठन के क्रांतिकारियों द्वारा खजाने को लूट लिया गया। सरकार ने षड्यंत्र में शामिल 29 क्रांतिकारियों को पकड़ लिया। चंद्रशेखर आजाद को पुलिस पकडनें में असफल रहीं। काकोरी केस के अभियुक्तों के बचाव के लिए गोविन्द वल्लभ पंत की अध्यक्षता में कांग्रेस ने बचाव समिति का गठन किया था। जिसके अन्य सदस्य चन्द्रभानुगुप्त, मोहन लाल सक्सेना, अजीत प्रसाद जैन और कृपाशंकर हेजला प्रमुख थे। इस मुकदमें में सरकारी वकील जगत नारायण मुल्ला थे। काकोरी षड्यंत्र केस में राम प्रसाद बिस्मिल, असफाक उल्ला खाँ, रोशन सिंह, राजेन्द्र लाहिड़ी को मुकदमा चलाकर फाँसी दे दी गयी। काकोरी काण्ड के आरोपी चन्द्रशेखर आजाद को फाँसी नहीं दी गयी थी, क्योंकि उन्हें पुलिस कभी गिरफ्तार नहीं कर पायी थी। वर्तमान में काकोरी काण्ड का नाम ‘काकोरी ट्रेन एक्शन’ कर दिया गया है।

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9 अगस्त, 1925 को उत्तर रेलवे के लखनऊ सहारनपुर संभाग के काकोरी नामक स्थान पर ‘8 डाउन ट्रेन’ पर डकैती डालकर हिन्दुस्तान रिपब्लिकन एसोसिएशन नामक संगठन के क्रांतिकारियों द्वारा खजाने को लूट लिया गया। सरकार ने षड्यंत्र में शामिल 29 क्रांतिकारियों को पकड़ लिया। चंद्रशेखर आजाद को पुलिस पकडनें में असफल रहीं। काकोरी केस के अभियुक्तों के बचाव के लिए गोविन्द वल्लभ पंत की अध्यक्षता में कांग्रेस ने बचाव समिति का गठन किया था। जिसके अन्य सदस्य चन्द्रभानुगुप्त, मोहन लाल सक्सेना, अजीत प्रसाद जैन और कृपाशंकर हेजला प्रमुख थे। इस मुकदमें में सरकारी वकील जगत नारायण मुल्ला थे। काकोरी षड्यंत्र केस में राम प्रसाद बिस्मिल, असफाक उल्ला खाँ, रोशन सिंह, राजेन्द्र लाहिड़ी को मुकदमा चलाकर फाँसी दे दी गयी। काकोरी काण्ड के आरोपी चन्द्रशेखर आजाद को फाँसी नहीं दी गयी थी, क्योंकि उन्हें पुलिस कभी गिरफ्तार नहीं कर पायी थी। वर्तमान में काकोरी काण्ड का नाम ‘काकोरी ट्रेन एक्शन’ कर दिया गया है।