Correct Answer:
Option A - तातारखाँ को हटाकर तुगरिल खाँ को बंगाल का इक्तादार बनाया गया जो बलबन का एक योग्य गुलाम सरदार था। परन्तु तुगरिल खाँ ने 1279 ई. में बलबन से विद्रोह कर दिया। इस विद्रोह से बलबन को एक बड़ा धक्का लगा। यह एक गुलाम सरदार का पहला विद्रोह था। यदि वह सफल हो जाता तो बलबन की सम्पूर्ण व्यवस्था नष्ट हो जाती।
A. तातारखाँ को हटाकर तुगरिल खाँ को बंगाल का इक्तादार बनाया गया जो बलबन का एक योग्य गुलाम सरदार था। परन्तु तुगरिल खाँ ने 1279 ई. में बलबन से विद्रोह कर दिया। इस विद्रोह से बलबन को एक बड़ा धक्का लगा। यह एक गुलाम सरदार का पहला विद्रोह था। यदि वह सफल हो जाता तो बलबन की सम्पूर्ण व्यवस्था नष्ट हो जाती।