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Q: ‘ध्वनि प्रस्थापन परमाचार्य’ की पदवी इनमें से किसको दी जाती है?
  • A. आनंदवर्धन
  • B. मम्मट
  • C. अभिनवगुप्त
  • D. उपर्युक्त में से एक से अधिक
  • E. उपर्युक्त में से कोई नहीं
Correct Answer: Option B - परवर्ती आचार्य मम्मट ने ध्वनि विरोधी आचार्यों जैसे- मुकुल भट्ट, कुन्तक, महिम भट्ट आदि की युक्तियों का खण्डन करके ध्वनि सिद्धान्त की स्थापना की। उन्होंने व्यंजना को काव्य के लिए आवश्यक माना। यही कारण है कि इन्हें ‘ध्वनि प्रतिष्ठापक परमाचार्य’ कहा जाता है। आचार्य आनन्दवर्धन, काव्य शास्त्र में ध्वनि सम्प्रदाय के प्रवर्तक के रूप में प्रसिद्ध है। अभिनवगुप्त, कश्मीर के एक दार्शनिक, रहस्यवादी और सौंदर्यशास्त्री थे। एक बहुभाषी व्यक्तित्व जिसने भारतीय संस्कृति पर मजबूत प्रभाव डाला।
B. परवर्ती आचार्य मम्मट ने ध्वनि विरोधी आचार्यों जैसे- मुकुल भट्ट, कुन्तक, महिम भट्ट आदि की युक्तियों का खण्डन करके ध्वनि सिद्धान्त की स्थापना की। उन्होंने व्यंजना को काव्य के लिए आवश्यक माना। यही कारण है कि इन्हें ‘ध्वनि प्रतिष्ठापक परमाचार्य’ कहा जाता है। आचार्य आनन्दवर्धन, काव्य शास्त्र में ध्वनि सम्प्रदाय के प्रवर्तक के रूप में प्रसिद्ध है। अभिनवगुप्त, कश्मीर के एक दार्शनिक, रहस्यवादी और सौंदर्यशास्त्री थे। एक बहुभाषी व्यक्तित्व जिसने भारतीय संस्कृति पर मजबूत प्रभाव डाला।

Explanations:

परवर्ती आचार्य मम्मट ने ध्वनि विरोधी आचार्यों जैसे- मुकुल भट्ट, कुन्तक, महिम भट्ट आदि की युक्तियों का खण्डन करके ध्वनि सिद्धान्त की स्थापना की। उन्होंने व्यंजना को काव्य के लिए आवश्यक माना। यही कारण है कि इन्हें ‘ध्वनि प्रतिष्ठापक परमाचार्य’ कहा जाता है। आचार्य आनन्दवर्धन, काव्य शास्त्र में ध्वनि सम्प्रदाय के प्रवर्तक के रूप में प्रसिद्ध है। अभिनवगुप्त, कश्मीर के एक दार्शनिक, रहस्यवादी और सौंदर्यशास्त्री थे। एक बहुभाषी व्यक्तित्व जिसने भारतीय संस्कृति पर मजबूत प्रभाव डाला।