Correct Answer:
Option A - अयोध्य सिंह उपाध्याय ‘हरिऔध’ के संबंध में सत्य कथन निम्नलिखित हैं-
1. रसिकेश उपनाम से ब्रजभाषा की रचना की थी।
2. ठेठ हिंदी का ठाठ नामक उपन्यास की रचना की थी।
3. रूक्मिनी परिचय नाटक की 1894 में रचना की थी।
• अयोध्या सिंह उपाध्याय ‘हरिऔध’ को डॉ. गणपतिचन्द्र गुप्त ने आधुनिक काल का सूरदास कहा है।
• हरिऔध कृत ‘प्रियप्रवास’ को खड़ी बोली हिंदी का प्रथम महाकाव्य माना जाता है। ‘प्रियप्रवास’ का सर्वप्रथम नाम ‘ब्रजांगना विलाप’ था। यह संपूर्ण काव्य संस्कृत के वर्णवृत्तों पर आधारित है।
• हरिऔध द्वारा ब्रजभाषा में रचित ‘रसकलश’ (1931 ई.) एक रीति ग्रंथ है।
A. अयोध्य सिंह उपाध्याय ‘हरिऔध’ के संबंध में सत्य कथन निम्नलिखित हैं-
1. रसिकेश उपनाम से ब्रजभाषा की रचना की थी।
2. ठेठ हिंदी का ठाठ नामक उपन्यास की रचना की थी।
3. रूक्मिनी परिचय नाटक की 1894 में रचना की थी।
• अयोध्या सिंह उपाध्याय ‘हरिऔध’ को डॉ. गणपतिचन्द्र गुप्त ने आधुनिक काल का सूरदास कहा है।
• हरिऔध कृत ‘प्रियप्रवास’ को खड़ी बोली हिंदी का प्रथम महाकाव्य माना जाता है। ‘प्रियप्रवास’ का सर्वप्रथम नाम ‘ब्रजांगना विलाप’ था। यह संपूर्ण काव्य संस्कृत के वर्णवृत्तों पर आधारित है।
• हरिऔध द्वारा ब्रजभाषा में रचित ‘रसकलश’ (1931 ई.) एक रीति ग्रंथ है।