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Q: ‘धनञ्जय:’ कीदृशो वायुप्रकार:?
  • A. क्षुत्कर:
  • B. पोषणकर:
  • C. उद्गिरणकर:
  • D. जृम्भणकर:
Correct Answer: Option B - ‘धनञ्जय:’ ‘पोषणकर:’ वायुप्रकार: अस्ति। अर्थात् ‘धनञ्जय:’ ‘पोषणकर:’ वायु प्रकार का एक भेद है। अत: प्राण, अपान, समान, उदान और व्यान ये पाँच प्राण वायु हैं लेकिन कुछ आचार्य इसके अतिरिक्त नाग, कूर्म, कृकल, देवदत्त और धनञ्जय को मानते हैं इनका कार्य क्रमश: डकार (वमन), उन्मीलन (पलकों का खुलना-मूँदना), क्षुत्कर (भूख उत्पन्न करना), जृम्भणकर: (जम्हाई), पोषणकर: (शरीर की पुष्टि करना) है। अर्थात् इन पाँच का पूर्वोक्त प्राणादि में अन्तर्भाव होने से प्राण वायु पाँच ही होती हैं। अत: प्रश्नानुसार विकल्प (d) सही है।
B. ‘धनञ्जय:’ ‘पोषणकर:’ वायुप्रकार: अस्ति। अर्थात् ‘धनञ्जय:’ ‘पोषणकर:’ वायु प्रकार का एक भेद है। अत: प्राण, अपान, समान, उदान और व्यान ये पाँच प्राण वायु हैं लेकिन कुछ आचार्य इसके अतिरिक्त नाग, कूर्म, कृकल, देवदत्त और धनञ्जय को मानते हैं इनका कार्य क्रमश: डकार (वमन), उन्मीलन (पलकों का खुलना-मूँदना), क्षुत्कर (भूख उत्पन्न करना), जृम्भणकर: (जम्हाई), पोषणकर: (शरीर की पुष्टि करना) है। अर्थात् इन पाँच का पूर्वोक्त प्राणादि में अन्तर्भाव होने से प्राण वायु पाँच ही होती हैं। अत: प्रश्नानुसार विकल्प (d) सही है।

Explanations:

‘धनञ्जय:’ ‘पोषणकर:’ वायुप्रकार: अस्ति। अर्थात् ‘धनञ्जय:’ ‘पोषणकर:’ वायु प्रकार का एक भेद है। अत: प्राण, अपान, समान, उदान और व्यान ये पाँच प्राण वायु हैं लेकिन कुछ आचार्य इसके अतिरिक्त नाग, कूर्म, कृकल, देवदत्त और धनञ्जय को मानते हैं इनका कार्य क्रमश: डकार (वमन), उन्मीलन (पलकों का खुलना-मूँदना), क्षुत्कर (भूख उत्पन्न करना), जृम्भणकर: (जम्हाई), पोषणकर: (शरीर की पुष्टि करना) है। अर्थात् इन पाँच का पूर्वोक्त प्राणादि में अन्तर्भाव होने से प्राण वायु पाँच ही होती हैं। अत: प्रश्नानुसार विकल्प (d) सही है।