Correct Answer:
Option C - ग्रीष्म ऋतु (जून-जुलाई) में दक्षिण-पश्चिम मानसून की अरब सागरीय मानसून शाखा पश्चिमी घाट से टकराती है। ये पवनें पश्चिमी घाट की ढलानों पर 900 से 1200 मी. की ऊँचाई तक चढ़ती हैं। अत: ये पवनें तत्काल ठण्डी होकर पश्चिमी घाट की पवनाभिमुखी ढाल तथा पश्चिमी तटीय मैदान पर 250 से 400 सेंटीमीटर के बीच अति उच्च वर्षा करती हैं। पश्चिमी घाट को पार करने के बाद ये पवनें नीचे उतरती हैं और गर्म होने लगती है। इससे इन पवनों की आर्द्रता में कमी आ जाती है। परिणामस्वरुप पश्चिमी घाट के पूर्व इन पवनों से नाम मात्र की वर्षा होती है। कम वर्षा का यह क्षेत्र वृष्टि छाया क्षेत्र कहलाता है।
C. ग्रीष्म ऋतु (जून-जुलाई) में दक्षिण-पश्चिम मानसून की अरब सागरीय मानसून शाखा पश्चिमी घाट से टकराती है। ये पवनें पश्चिमी घाट की ढलानों पर 900 से 1200 मी. की ऊँचाई तक चढ़ती हैं। अत: ये पवनें तत्काल ठण्डी होकर पश्चिमी घाट की पवनाभिमुखी ढाल तथा पश्चिमी तटीय मैदान पर 250 से 400 सेंटीमीटर के बीच अति उच्च वर्षा करती हैं। पश्चिमी घाट को पार करने के बाद ये पवनें नीचे उतरती हैं और गर्म होने लगती है। इससे इन पवनों की आर्द्रता में कमी आ जाती है। परिणामस्वरुप पश्चिमी घाट के पूर्व इन पवनों से नाम मात्र की वर्षा होती है। कम वर्षा का यह क्षेत्र वृष्टि छाया क्षेत्र कहलाता है।